भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान को लेकर तीखा हमला बोला है. टीएमसी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के लोकसभा अध्यक्ष से मिलने जाने और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस अब संगठनात्मक रूप से बिखर चुकी है और पार्टी के भीतर गंभीर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं.
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में अब किसी तरह की एकजुटता नहीं बची है. उन्होंने दावा किया, 'तृणमूल की शुरुआत क्या होगी? तृणमूल तो पहले ही टुकड़े-टुकड़े हो चुकी है. विधानसभा में भी विधायक बंटे हुए हैं और संसद में भी विभाजन साफ दिखाई दे रहा है.'
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के पास अब न कोई नीति बची है, न कोई आदर्श और न ही कोई स्पष्ट राजनीतिक दर्शन. उनके मुताबिक, पार्टी अब केवल सिंडिकेट, पैसे और कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गई है.
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के रिश्ते का जिक्र करते हुए अग्निमित्रा पॉल ने महाभारत का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जिस तरह धृतराष्ट्र का दुर्योधन के प्रति अंधा स्नेह उसके पतन का कारण बना था, उसी तरह ममता बनर्जी का अभिषेक बनर्जी के प्रति अत्यधिक लगाव आज तृणमूल कांग्रेस के पतन की वजह बन गया है.
टीएमसी सांसद काकोली घोष के बेटे द्वारा पार्टी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी उन्होंने टिप्पणी की. अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार लंबे समय से पार्टी की वरिष्ठ नेता रही हैं. ऐसे में यदि आज भ्रष्टाचार या टिकट वितरण में पैसों के लेन-देन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उन्हें इतने वर्षों तक यह सब क्यों नहीं दिखाई दिया.
उन्होंने कहा, '15 साल से वह वरिष्ठ नेता हैं. क्या उन्हें पहले भ्रष्टाचार नहीं दिखा? क्या टिकट के बदले पैसे लेने की बात उन्हें मालूम नहीं थी? पार्टी में क्या हो रहा था, इसकी जानकारी सभी को थी.'
सुदीप बंद्योपाध्याय को बागी सांसद के खेमे और उनकी पत्नी नैना बंद्योपाध्याय ममता बनीजी के साथ को लेकर लगाई जा रही राजनीतिक अटकलों पर भी भाजपा नेता ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि तृणमूल नेताओं के लिए 'दो नावों में पैर रखकर चलना' कोई नई बात नहीं है और पार्टी के भीतर कौन किसके साथ है, यह उसका आंतरिक मामला है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा खुलकर सामने आने लगे हैं.