उत्तर प्रदेश एटीएस ने मुरादाबाद में छापेमारी कर सहारनपुर निवासी बीडीएस छात्र हारिश अली को आईएसआईएस के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है. हारिश राजस्थान में नीट की तैयारी के दौरान पहली बार आतंकी संगठन के संपर्क में आया था. वह 'सेशन' और 'डिस्कॉर्ड' जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर फर्जी नामों से ग्रुप चलाकर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा था. आरोपी वीपीएन का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाता था और भारत के खिलाफ साजिशें रचने वाले विदेशी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था. पुलिस अब उसे कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी.
क्रिप्टोकरेंसी फंडिंग और 'अल इत्तेहाद' का नेटवर्क
एटीएस की जांच में हारिश के पास से क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग मिलने के पुख्ता सुराग मिले हैं, जिसकी गहनता से जांच की जा रही है. उसने 'अल इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन' नाम से अपना एक गुप्त ग्रुप बना रखा था, जहां वह आईएसआईएस की प्रोपेगेंडा मैगजीन 'दाबिक' और 'अल-नाबा' शेयर करता था.
सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर इस समय आधा दर्जन से अधिक अन्य संदिग्ध भी हैं, जो हारिश के इस डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा थे. यह मॉड्यूल युवाओं को फिदायीन हमलों के लिए भड़काने और शरिया कानून लागू करने की कट्टरपंथी सोच पर काम कर रहा था.
जिहादी प्रोपेगेंडा का हथियार बना सोशल मीडिया
पूछताछ में पता चला कि हारिश अली लोकतंत्र को खारिज कर खिलाफत व्यवस्था स्थापित करने की मानसिकता रखता था. उसने सोशल मीडिया को कट्टरता फैलाने का हथियार बना लिया था, जहां वह मारे गए आतंकियों की तस्वीरें, जहरीले भाषण और ऑडियो-वीडियो शेयर करता था.
एटीएस के मुताबिक, वह न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान के आईएसआईएस हैंडलर्स से भी जुड़ा हुआ था. मुरादाबाद के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसने अपने कई साथियों को भी इस दलदल में खींचने की कोशिश की थी. एटीएस अब उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए छापेमारी कर रही है.