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यूटिलिटी

Credit Card Trap: मिनिमम पेमेंट एक जाल... जिंदगी भर की कमाई हो जाएगी छू मंतर!

क्रेडिट कार्ड को लेकर हो जाएं सतर्क
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अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल करते हैं और पैसे खत्‍म होने पर खूब खर्च करते हैं तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए, क्‍योंकि आपकी एक गलती आपकी जिंदगीभर की कमाई समाप्‍त कर सकती है, और ये गलती ज्‍यादातर क्रेडिट कार्ड होल्‍डर करते हैं.

ज्‍यादातर लोग करते हैं ये गलती
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जब क्रेडिट कार्ड के बिलों का संभालना मुश्किल हो जाता है तो ज्‍यादातर उधार लेने वाले आमतौर पर बैंकों की ओर से पेश किए गए दो विकल्‍पों का सामना करते हैं. पहला विकल्‍प बकाया राशि को किश्‍तों में चुकाना और दूसरा विकल्‍प है सिर्फ मिनिमम ड्यू का ही पेमेंट करना. 

फंसा सकते हैं ये विकल्‍प
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पहली नजर में देखें तो ये विकल्‍प मददगार हो सकते हैं, लेकिन असल में कहानी कुछ और ही है. इससे धीरे-धीरे आपका कर्ज बढ़ता ही जाता है. मिनिमम बकाया राशि वह राशि होता है, जो बैंक आपको भारी जुर्मान से बचने के लिए कहता है, लेकिन यह कुल बकाया राशि का एक छोटा हिस्‍सा होता है. बाद में बैंक आपके बाकी बचे बकाया राशि पर ब्‍याज लगता है. 

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40 फीसदी तक ब्‍याज
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भारत में क्रेटिड कार्ड का ब्‍याज बहुत ज्‍यादा है. टैक्‍स, जुर्माना और ब्‍याज मिलाकर यह 30 से 40 फीसदी हो सकता है. यहीं से खतरा शुरू होता है. जब न्‍यूनतम भुगतान करते हैं तो आप डिफॉल्‍ट होने से बच जाते हैं, लेकिन बकाया राशि पर हर महीने ब्‍याज लगता रहेगा. साथ ही अगर आप नया खर्च करते हैं तो ये रकम और भी बढ़ सकती है. 

मिनिमम पेमेंट एक जाल
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न्यूनतम देय भुगतान लोगों को आर्थिक रूप से फंसाने का एक कारण मनोवैज्ञानिक है. कम भुगतान राशि से यह भ्रम पैदा होता है कि स्थिति कंट्रोल में है. कार्ड होल्‍डर्स को लगता है कि मिनिमम अमाउंट से वे खाते को डिफॉल्‍ट होने से रोक रहे हैं, और वसूली का दबाव कम हो जाता है.

राहत नहीं, बल्कि एक ट्रैप
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लेकिन यह शॉर्ट टर्म राहत के बजाय, ब्‍याज आक्रामक तौर से बढ़ता रहता है. कई मामलों में, लोग समय के साथ मूल खरीद मूल्य से कहीं अधिक ब्याज के रूप में भुगतान करते है. 

किश्‍तों में कर सकते हैं भुगतान
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इसकी तुलना में किश्‍तों में बकाया का भुगतान करना ज्‍यादा सही माना जाता है. भले ही आपको ब्‍याज ज्‍यादा पेमेंट करना पड़े, लेकिन आपका कर्ज धीरे-धीरे कम होता रहेगा, ना कि बढ़ेगा. जबकि मिनिमम बकाया भुगतान करने से आपका पूराना कर्ज बना रहेगा.

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