उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और समाजवादी पार्टी के विधायकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ. निषाद ने बजट की सराहना करते हुए विपक्षी दलों पर तीखे प्रहार किए, जिससे आक्रोशित होकर सपा सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए. सपा विधायकों ने मंत्री के पास जाकर उनके हाथ से भाषण के कागज छीन लिए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की स्थिति बन गई. संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इस घटना को मंत्री पर हमले की कोशिश करार देते हुए पीठ से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान बुधवार शाम को कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपने संबोधन में कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय ने अंग्रेजों और मुगलों के बाद 75 साल से इन 'बेईमानों' से लड़ाई लड़ी है.
क्या मछली उर्दू पढ़ती है?
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने 30 साल की सत्ता में मछुआ समाज को एक रुपये नहीं दिया. मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि उनके विभाग के एक पद को उर्दू अनुभाग में बदल दिया गया.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निषाद या मछली उर्दू पढ़ती है? उन्होंने सपा नेताओं को मछुआरों का 'मगरमच्छ' करार दिया.
'हमें यहां हमारे समाज ने भेजा है'
डॉ. निषाद ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने नौकरी लूटी, रोजी रोटी लूट ली. केवटवा, मल्लावा और बिंदवा कह कर मारा जाता था. गोरखपुर में हमने आंदोलन किया. हमारे समाज ने हमें यहां भेजा है कि जाओ और इन लोगों का पर्दाफाश करो.
मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए एक शब्द पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया है जो समाज के लिए अपमानजनक है.
निषाद ने मांग की कि नेता प्रतिपक्ष इसके लिए तुरंत माफी मांगें. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो वह नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवा देंगे.
वेल पर पहुंचे सपा विधायक
इस दौरान सदन में लगातार टोकाटाकी और शोर-शराबा होता रहा. सपा सदस्यों के वेल में आने के बाद भी डॉ. निषाद चुप नहीं हुए और अपनी बात जारी रखी. इसी बीच कुछ सपा विधायक उनकी ओर बढ़े और उनके हाथ से दस्तावेज छीन लिए.
मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे सपा का असली आचरण बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की. विवाद बढ़ता देख विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना को खुद सदन में आना पड़ा.
उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराया और सदस्यों को हिदायत दी कि सदन की कार्यवाही को मर्यादित तरीके से चलने दिया जाए.