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दो IAS की शादी चर्चा में...ट्रेनिंग में मुलाकात फिर हुआ प्यार, अब कोर्ट मैरिज बाद में लेंगे फेरे

मसूरी की ट्रेनिंग के दौरान शुरू हुई दोस्ती अब शादी में बदल गई है. दो युवा आईएएस अधिकारियों ने सादगी से कोर्ट मैरिज कर नई जिंदगी की शुरुआत की. दोनों की मुलाकात ट्रेनिंग अकादमी में हुई, जहां साथ पढ़ते-समझते रिश्ते ने गहराई पकड़ी. फिलहाल परिवार की मौजूदगी में कोर्ट मैरिज हुई है, जबकि पारंपरिक रीति-रिवाज से फेरे बाद में लिए जाएंगे. प्रशासनिक गलियारों में इस जोड़ी की चर्चा तेज है.

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आईएएस माधव भारद्वाज और अदिति वासने ने कोर्ट मैरिज की (Photo: ITG)
आईएएस माधव भारद्वाज और अदिति वासने ने कोर्ट मैरिज की (Photo: ITG)

2023 बैच के दो युवा आईएएस अधिकारियों की शादी इन दिनों चर्चा में है. वजह सिर्फ यह नहीं कि दोनों प्रशासनिक सेवा में हैं, बल्कि यह भी कि उन्होंने दिखावे से दूर रहकर पहले कोर्ट मैरिज की और बाद में पारंपरिक फेरे लेने का फैसला किया है. मसूरी की पहाड़ियों में शुरू हुई  पहचान के साथ शुरू हुई इस प्रेम कहानी ने अब जीवनभर का साथ तय कर लिया है.

अलवर में एसडीएम पद पर तैनात माधव भारद्वाज और गुजरात के जामनगर में एसडीएम अदिति वासने ने अलवर के मिनी सचिवालय में जिला कलेक्टर अर्पिता शुक्ला के समक्ष अपनी शादी रजिस्टर्ड कराई. कार्यक्रम बेहद सादा रहा. न बैंड-बाजा, न लंबी गेस्ट लिस्ट और न ही किसी प्रकार का तामझाम. केवल दोनों के माता-पिता, भाई-बहन और कुछ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

ट्रेनिंग से शुरू हुई कहानी

दोनों की मुलाकात आईएएस प्रशिक्षण के दौरान हुई थी. एक ही बैच, समान लक्ष्य और देशसेवा का साझा संकल्प यही परिचय धीरे-धीरे दोस्ती में बदला. प्रशिक्षण के दौरान साथ पढ़ाई, चर्चाएं और प्रशासनिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श ने उन्हें करीब ला दिया. समय के साथ यह रिश्ता विश्वास और समझ में बदल गया. जब दोनों ने जीवनसाथी बनने का निर्णय लिया तो परिवारों को इसकी जानकारी दी. दोनों पक्षों की सहमति मिलने के बाद विवाह की प्रक्रिया तय की गई. व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पहले विवाह पंजीकरण कराने का निर्णय लिया.

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मिनी सचिवालय बना विवाह स्थल

अलवर के मिनी सचिवालय में विवाह पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी की गईं. जिला कलेक्टर अर्पिता शुक्ला की मौजूदगी में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए और कानूनी रूप से विवाह संपन्न हुआ. माहौल औपचारिक जरूर था, लेकिन उसमें आत्मीयता की कमी नहीं थी. जिस परिसर में रोज प्रशासनिक फैसले लिए जाते हैं, वहीं दो अधिकारियों ने अपने निजी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला दर्ज कराया. समारोह छोटा था, लेकिन संदेश बड़ा. शादी दिखावे से नहीं, आपसी समझ और प्रतिबद्धता से होती है.

कौन हैं माधव और अदिति?

माधव भारद्वाज मूल रूप से मसूरी निवासी राजकुमार भारद्वाज के बेटे हैं. सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के बाद उन्हें राजस्थान कैडर मिला और वर्तमान में वे अलवर में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं. अदिति वासने उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली हैं. उनके पिता व्यवसायी हैं और वे तीन भाई-बहनों में से एक हैं. अदिति को गुजरात कैडर मिला और वे जामनगर में एसडीएम के रूप में तैनात हैं. दोनों अपने-अपने बैच के मेधावी अधिकारियों में गिने जाते हैं और पहले ही प्रयास में आईएएस बने. अलग-अलग राज्यों में तैनाती के बावजूद उन्होंने अपने रिश्ते को संतुलन और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ाया.

बाद में होंगे फेरे

माधव और अदिति ने बताया कि वे जल्द ही एक शुभ मुहूर्त में मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह संस्कार भी करेंगे. उनके अनुसार अग्नि के समक्ष फेरे और पारंपरिक रस्में विवाह की पूर्णता का प्रतीक हैं. हालांकि वह आयोजन भी सीमित दायरे में होगा और केवल परिवार के सदस्य ही शामिल होंगे.

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क्यों चर्चा में है यह शादी ?

लोगों का कहना  है कि आज के दौर में जहां शादियां अक्सर भव्य आयोजनों और बड़े खर्च के कारण चर्चा में रहती हैं. ऐसे समय में दो युवा आईएएस अधिकारियों का सादगी से कोर्ट मैरिज करना और बाद में सीमित पारंपरिक कार्यक्रम रखने का निर्णय लोगों का ध्यान खींच रहा है. यह शादी सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है. कई लोग इसे सादगी और संतुलित सोच की मिसाल बता रहे हैं. प्रशासनिक सेवा जैसे प्रतिष्ठित पद पर रहते हुए भी निजी जीवन के फैसले को सरल रखना एक अलग संदेश देता है.

सोशल मीडिया पर बरेली के अवध प्रकाश लिखते हैं कि अलवर में हुई यह शादी भले ही बिना शोर-शराबे के संपन्न हुई हो, लेकिन उसने एक शांत और सकारात्मक संदेश जरूर दिया है. विवाह का मूल अर्थ दो व्यक्तियों और दो परिवारों का मिलन है, न कि भव्य आयोजन. डिजिटल दौर में जहां हर आयोजन को भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाता है, वहां यह सादगी भरी शादी अपनी अलग पहचान बना रही है. यही वजह है कि दो आईएएस अधिकारियों का यह विवाह इन दिनों चर्चा में है क्योंकि यहां कहानी दिखावे की नहीं, समझ और संकल्प की है.

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