उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुए एक विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. 18 जनवरी को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र संगम स्नान करने से रोका गया था. इसी दौरान कुछ युवा ब्राह्मण पुजारियों, जिन्हें बटुक कहा जाता है, उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और उन्हें पुलिस हिरासत में ले लिया गया.
इस घटना पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि किसी ब्राह्मण की शिखा को छूना या खींचना बेहद गंभीर अपराध है और यह हिंदू धार्मिक परंपराओं का अपमान है. पाठक ने कहा कि यह एक बड़ा पाप है और इसमें शामिल लोगों को सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए.
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में ब्राह्मण पुजारियों से कथित बदसलूकी
डिप्टी सीएम ने यह भी बताया कि इस मामले में पुलिसकर्मियों सहित सभी आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जवाबदेही तय कर रही है और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा.
पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई का दावा
वहीं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्रजेश पाठक के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में हर कर्म को पाप और पुण्य की कसौटी पर देखा जाता है. उन्होंने खुशी जताई कि सरकार के एक नेता ने इस धार्मिक दृष्टिकोण को समझा और इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया. इस घटना के बाद प्रशासन और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और पूरे प्रदेश में इसे लेकर चर्चा जारी है.