हिंदू संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज देश पर शासन करने वाले लोग गाय को 'मां नहीं बल्कि संपत्ति' मानते हैं, और इस दृष्टिकोण को चुनौती देने की जरूरत है. संत ने ये टिप्पणियां जौनपुर में गोमती नदी के किनारे मौजूद ऋषि जमदग्नि के आश्रम में दर्शन के दौरान कीं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ रक्षा के लिए यात्रा शुरू की है. वह 11 मार्च को लखनऊ में जनसभा भी करेंगे.
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय को 'राष्ट्र माता' घोषित करने और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए दी गई 40 दिन की समय सीमा समाप्त होने पर 11 मार्च को लखनऊ में गौ संरक्षण के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा.
उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को अपने 11 मार्च के आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया.
राज्य सरकार को निशाना बनाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को परंपरागत रूप से माता के रूप में पूजा जाता रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार इसे केवल संपत्ति के रूप में मान रही है. उन्होंने कहा, 'ऐसी स्थिति में शासक को चुनौती देना जरूरी हो गया है.'
उन्होंने कहा कि जौनपुर की भूमि जमदग्नि और परशुराम से जुड़ी हुई है, और गौसेवा की परंपरा लंबे समय से गोमती नदी के तट से जुड़ी हुई है.
उन्होंने कहा कि जमदग्नि ने उसी स्थान पर एक गाय की सेवा और रक्षा की थी, और जब एक राजा उसे जबरदस्ती ले गया, तो परशुराम ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और उसे वापस ले आए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संतों का यह कर्तव्य है कि वे समाज और धर्म की रक्षा के लिए सत्य बोलें और अन्याय का विरोध करें.
उन्होंने कहा कि उन्होंने गौ संरक्षण अभियान के तहत वाराणसी से लखनऊ की यात्रा शुरू की है और गौ आंदोलन के अगले चरण को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए 11 मार्च को राज्य की राजधानी पहुंचेंगे.
वाराणसी छोड़ने से पहले, उन्होंने संकट मोचन हनुमान मंदिर और चिंतामणि गणेश मंदिर सहित कई मंदिरों का दौरा किया, जहां उन्होंने हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जन प्रतिनिधि गौ संरक्षण के संबंध में लोगों की भावनाओं को जगाने में विफल रहे हैं, और इस मुद्दे को संसद और राज्य विधानसभाओं में गंभीरता से उठाया जाना चाहिए.