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42 साल से मौन, भोजन-पानी भी त्यागा... माघ मेले में पहुंचे चाय वाले बाबा की अनोखी कहानी

प्रयागराज के माघ मेला में एक ऐसे मौनी संत चर्चा में हैं, जिन्होंने पिछले 42 साल से एक शब्द भी नहीं बोला. लोग उन्हें चाय वाले बाबा के नाम से जानते हैं. वे सिर्फ चाय पर जीवन बिताते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त नोट्स और गाइडेंस देकर शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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प्रयागराज मेले में पहुंचे बाबा 42 साल से मौन हैं. (Photo: Screengrab)
प्रयागराज मेले में पहुंचे बाबा 42 साल से मौन हैं. (Photo: Screengrab)

माघ मेले में जहां साधु-संतों की तपस्या और आस्था के रंग दिखते हैं, वहीं एक ऐसे मौनी बाबा भी हैं, जो बिना एक शब्द बोले शिक्षा का दीप जला रहे हैं. पिछले 42 साल से मौन व्रत धारण किए यह बाबा सिर्फ चाय पर जीवन बिताते हैं. वे सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले छात्रों को गाइडेंस देते हैं. उनका अनोखा तरीका और जीवनशैली हैरान करने वाली है. लोग उन्हें पयाहारी मौनी महाराज या चाय वाले बाबा के नाम से जानते हैं.

पिछले 42 वर्षों से बाबा ने एक शब्द भी नहीं बोला. वे अपनी बात लिखकर बताते हैं, इशारों से समझाते हैं और मुस्कान से संवाद करते हैं. उनके पंडाल पर आने वाले श्रद्धालु पहले हैरान होते हैं, फिर प्रभावित.

42 साल पहले लिया मौन का संकल्प

मौनी महाराज का वास्तविक नाम दिनेश स्वरूप ब्रह्मचारी है. वे प्रतापगढ़ के चिलबिला क्षेत्र स्थित शिवशक्ति बजरंग धाम से जुड़े हैं. वे शिक्षक परिवार से आते हैं और बायोलॉजी में बीएससी कर चुके हैं. उनके पिता प्राचार्य थे.

Silent for 42 years gave up food water story of Chai wale Baba Magh Mela lcla

पिता के निधन के बाद उन्हें शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति भी मिली, लेकिन इसी दौरान उनका झुकाव अध्यात्म की ओर बढ़ गया. सांसारिक जीवन से दूरी बनती गई और अंततः उन्होंने संन्यास का मार्ग चुन लिया. तभी से मौन व्रत धारण कर लिया- ऐसा मौन जो आज तक टूटा नहीं.

अन्न-जल त्याग, सिर्फ चाय पर जीवन

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मौनी महाराज की सबसे अनोखी बात उनकी दिनचर्या है. वे न भोजन करते हैं और न ही पानी पीते हैं. उनका पूरा दिन सिर्फ चाय पर चलता है. वे रोज करीब 10 कप चाय लेते हैं. यही वजह है कि श्रद्धालुओं ने उन्हें चाय वाले बाबा नाम दे दिया.

उनके पंडाल में आने वाले लोगों को भी वे चाय को ही प्रसाद के रूप में देते हैं. कई लोग इसे आस्था से जोड़ते हैं, तो कई जिज्ञासा से उनके जीवन के बारे में जानना चाहते हैं.

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बाबा सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन देते हैं.

बाबा का पढ़ाने का तरीका भी अलग है. वे बोलते नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यम का सहारा लेते हैं. वॉट्सएप पर नोट्स तैयार कर छात्रों को भेजते हैं, सवालों के जवाब लिखकर देते हैं और पूरी रणनीति समझाते हैं.

प्रतियोगी छात्रों का दावा है कि हर साल उनके मार्गदर्शन से 2-3 छात्रों का चयन सिविल सेवाओं में होता है. मेले में उनसे मिलने आए कई छात्रों ने बताया कि बाबा का अनुशासन और समर्पण उन्हें प्रेरित करता है.

तेज रफ्तार बाइक का भी शौक

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आध्यात्मिक जीवन जीने वाले इन मौनी संत का एक अलग रूप भी है. उन्हें तेज रफ्तार बाइक चलाने का शौक है. श्रद्धालुओं के मुताबिक, हाइवे पर उनकी बाइक की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है.

वे प्रतापगढ़ से प्रयागराज की दूरी करीब 45 मिनट में तय कर मेला क्षेत्र पहुंचे. बाबा का यह रूप युवाओं के बीच खास चर्चा का विषय बना हुआ है.

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ग्रंथ भी लिखा, संदेश भी दिया

मौनी महाराज ने धर्म कर्म मर्म सागर नाम से एक ग्रंथ भी लिखा है. इसमें जन्म से मृत्यु तक के संस्कार, दिनचर्या, आचरण और जीवन के धार्मिक नियमों का उल्लेख है.

वे मानते हैं कि मौन रहने से ऊर्जा का संचय होता है और वही ऊर्जा लोक कल्याण में लगानी चाहिए. उनका संदेश है कि कम बोलकर ज्यादा काम किया जाए.

मेला क्षेत्र में उनके पंडाल पर भीड़ जुट रही है. कोई उनके मौन से प्रभावित है, कोई उनके त्याग से, तो कोई शिक्षा के प्रति उनके समर्पण से.

जब लोग उनसे कुछ पूछते हैं, तो वे कागज पर लिखकर जवाब देते हैं. कई बार सिर्फ मुस्कुराकर हाथ जोड़ लेते हैं. लेकिन मिलने वाले कहते हैं- बाबा बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाते हैं.

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