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संभल: कब्रिस्तान की जमीन पर बनीं दुकानें और मकान तोड़ने का रास्ता साफ, कोर्ट ने हटाया स्टे

यूपी के संभल में जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर बने मकान और दुकानों को तोड़ने का रास्ता साफ हो गया है. प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए स्टे को कोर्ट ने हटा दिया है. अब तहसीलदार कोर्ट से अंतिम फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन शुरू होगा. 30 दिसंबर को 26 राजस्व अधिकारियों की टीम ने कब्रिस्तान पर हुए अवैध निर्माण की पैमाइश की थी.

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30 दिसंबर को राजस्व टीम ने की थी अवैध निर्माण की पैमाईश. (Photo: Screengrab)
30 दिसंबर को राजस्व टीम ने की थी अवैध निर्माण की पैमाईश. (Photo: Screengrab)

यूपी के संभल में कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से बनी दुकानों और मकानों को हटाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. प्रशासन की टीम ने बीते दिनों पैमाइश की थी. इसके बाद संभल सिविल कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. उसे अब सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इसी के साथ अब तहसीलदार कोर्ट से अवैध निर्माण को हटाने का अंतिम आदेश जारी होगा, जिसके बाद प्रशासन जल्द कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है.

दरअसल, संभल की जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत एडवोकेट सुभाष चंद्र त्यागी ने डीएम को पत्र देकर की थी. इसके बाद प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक राजस्व कर्मियों की टीम बनाकर 30 दिसंबर 2025 को उस जमीन पर बने मकानों और दुकानों की पैमाइश की थी.

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इस दौरान कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा होने की बात सामने आई थी. इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने कब्जा करने वालों को नोटिस कर जवाब मांगा था, लेकिन कब्जेदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मगर हाई कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली. हाई कोर्ट ने कब्जा करने वालों को तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखने को कहा था.

यह भी पढ़ें: मदरसा, मस्जिद और दुकानें खुद तोड़ने लगे ग्रामीण... संभल में प्रशासन ने दिया था 8 दिन का अल्टीमेटम

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इसके बाद जनवरी में 18 में से 15 लोगों ने संभल सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें प्रदेश सरकार की तरफ से डीएम व तहसीलदार, नगर पालिका के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बैंक बोर्ड के सीओ को प्रतिवादी बनाया गया था. सिविल कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में शामिल 15 लोगों में से चार लोगों ने याचिका वापस ले ली थी.

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इसके बाद सिविल जज ललित कुमार ने फरवरी में मामले में सुनवाई पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. मार्च में अलग-अलग तारीख पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 27 मार्च को आदेश रिजर्व कर लिया था. वहीं अब 10 अप्रैल को सिविल कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए स्टे को हटा लिया है.

इसी के साथ अब जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर बनीं 18 दुकानें और मकानों के अवैध निर्माण को हटाने का रास्ता साफ हो चुका है. एडवोकेट नलिन जैन का कहना है कि सिविल जज ललित कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश रिजर्व कर लिया था . कब्जा करने वालों ने संभल कोर्ट को भ्रमित करते हुए जो स्टे ले लिया था, उसको निरस्त कर दिया गया है. कब्रिस्तान पर अब कोई स्टे नहीं है.

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