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संभल: मस्जिद पर चला बुलडोजर, मिले 'I LOVE MUHAMMAD' वाले पोस्टर और झंडा

संभल के कसेरुआ गांव में कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बनी कथित अवैध मुस्तफा कादरी मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की. ध्वस्तीकरण के दौरान मस्जिद परिसर से 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर और एक झंडा मिलने का दावा किया गया, जिसकी पुलिस जांच कर रही है. प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की गई है. क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

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भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. Photo ITG
भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. Photo ITG

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने शनिवार को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को ध्वस्त करना शुरू कर दिया. प्रशासन की मौजूदगी में दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से कई घंटे तक कार्रवाई चली. संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई.

कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से "आई लव मोहम्मद" लिखे पोस्टर और हरे रंग का एक झंडा मिलने का दावा भी सामने आया है. पुलिस ने इन सामग्रियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बरामद पोस्टरों और झंडे के संबंध में जांच की जा रही है तथा यह पता लगाया जाएगा कि इन्हें वहां किसने रखा था और उनका उद्देश्य क्या था. उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 409 की भूमि कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी. जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान यहां मस्जिद निर्माण और कब्जे का मामला सामने आया था. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया. सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति को अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके.

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संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की गई, लेकिन अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई.

तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कब्रिस्तान के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग के बाद अभिलेखों की जांच की गई थी, जिसमें आरक्षित भूमि पर निर्माण का मामला सामने आया. प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि को ग्राम सभा के माध्यम से कब्रिस्तान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.

फिलहाल इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है.

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