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रिंकू सिंह का यूटर्न, अपनी बातों से पलटे... अब IAS से नहीं बनेंगे PCS अधिकारी

यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने यू-टर्न लेते हुए अपना तकनीकी इस्तीफा वापस ले लिया है. काम न मिलने और ‘नो वर्क-नो पे’ की बात कहकर उन्होंने इस्तीफा दिया था और PCS में लौटने की इच्छा जताई थी. अब इस्तीफा वापसी के बाद साफ हो गया है कि वे IAS से PCS नहीं बनेंगे. अभी आगे की तैनाती पर निर्णय बाकी है.

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आईएएस रिंकू सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया (Photo: ITG)
आईएएस रिंकू सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनका इस्तीफा नहीं, बल्कि उससे लिया गया यू-टर्न है. उन्होंने अपना तकनीकी इस्तीफा वापस ले लिया है. हालांकि इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

यह मामला मार्च के आखिरी हफ्ते में तब सामने आया था, जब रिंकू सिंह राही ने 26 मार्च 2026 को राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग और केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (DOPT) को तकनीकी इस्तीफा भेजा था. यह कोई सामान्य इस्तीफा नहीं था, बल्कि सिस्टम के कामकाज को लेकर असंतोष का एक संदेश भी दिया गया था .

रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की सबसे ज्यादा चर्चा उनके पत्र की एक पंक्ति को लेकर भी हुई थी. उन्होंने लिखा था कि संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है. 30 मार्च को जैसे ही यह पत्र सार्वजनिक हुआ, प्रशासनिक हलकों में बहस शुरू हो गई थी. यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई सिस्टम के भीतर ऐसी स्थिति है, जहां नियमों से अलग कोई व्यवस्था काम कर रही है. हालांकि इस पर भी किसी स्तर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी. रिंकू सिंह राही की नाराजगी केवल पद या पोस्टिंग तक सीमित नहीं थी. उन्होंने साफ कहा था कि प्रशासनिक सेवा का उद्देश्य जनता के लिए काम करना है. अगर अधिकारी को काम ही न मिले, तो उस पद पर बने रहने का क्या मतलब ? उनका तर्क था सरकारी वेतन जनता के टैक्स से आता है, इसलिए बिना काम के वेतन लेना सही नहीं है. 

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क्या है तकनीकी इस्तीफा

उन्होंने जो इस्तीफा दिया था, वह तकनीकी इस्तीफा था. इसका अर्थ यह होता है कि अधिकारी सेवा पूरी तरह नहीं छोड़ता, बल्कि अपनी पूर्ववर्ती सेवा में लौटना चाहता है. रिंकू सिंह राही ने अपने पत्र में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर वापस भेजे जाने की मांग की थी. उनका कहना था कि वे वहां ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं, क्योंकि वह पद जमीनी स्तर से जुड़ा हुआ है. नियमों के मुताबिक, लीन पीरियड के दौरान अधिकारी तीन साल तक अपनी पुरानी सेवा में वापस जा सकता है. रिंकू सिंह इसी प्रावधान का इस्तेमाल करना चाहते थे.

‘काम चाहिए, पद नहीं’

रिंकू सिंह राही की पूरी बात का केंद्र ‘काम’ रहा. उन्होंने कहा था कि उन्हें कहीं भी तैनात कर दिया जाए, लेकिन उन्हें सक्रिय जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. बिना काम के बैठे रहना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है. उनकी प्राथमिकता साफ रही जमीनी स्तर पर काम करना. उनका मानना है कि असली प्रशासन वहीं दिखाई देता है, जहां सीधे जनता से जुड़ाव होता है. इस्तीफे के बाद यह भी चर्चा शुरू हो गई थी कि कहीं उनका अगला कदम राजनीति की ओर तो नहीं है. लेकिन उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया था. उन्होंने साफ कहा कि उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है. वे प्रशासनिक सेवा के भीतर रहकर ही काम करना चाहते हैं और जनता की सेवा करना ही उनकी प्राथमिकता है.

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अब इस्तीफा वापस

इसी बीच अब यह जानकारी सामने आई है कि रिंकू सिंह राही ने अपना तकनीकी इस्तीफा वापस ले लिया है. यह प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूरी की गई और इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई. फिलहाल रिंकू सिंह राही राजस्व परिषद से संबद्ध हैं और संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें आगे किस तरह की जिम्मेदारी दी जाती है. 

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