scorecardresearch
 

अलंकार अग्निहोत्री ने किया परिवार की परंपरा का पालन, मां और भाभी भी ठुकरा चुकी हैं पद

पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को लेकर परिवार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला आत्मसम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है. परिजनों के अनुसार परिवार में पहले भी आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर नौकरियां छोड़ी गई हैं. उनका कहना है कि इस मामले को किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

Advertisement
X
अलंकार अग्निहोत्री (Photo- ITG)
अलंकार अग्निहोत्री (Photo- ITG)

कानपुर के श्याम नगर निवासी पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को लेकर परिवार की तरफ से कई अहम बातें सामने आई हैं. परिजनों का कहना है कि अलंकार का यह फैसला किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के समर्थन में नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में लिया गया है. परिवार का दावा है कि यह निर्णय उनकी पारिवारिक परंपरा और मूल्यों का हिस्सा है.

अलंकार के ताऊ और श्याम नगर निवासी सेवानिवृत्त विंग कमांडर एस.के. सिंह ने बताया कि उनके परिवार में आत्मसम्मान को सर्वोपरि माना गया है और किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अलंकार के इस्तीफे को इसी परंपरा के तहत देखा जाना चाहिए.

परिवार बोला राजनीतिक या धार्मिक समर्थन से नहीं

एस.के. सिंह के अनुसार, अलंकार की मां ने भी पहले आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर अपनी बैंक की नौकरी से इस्तीफा दिया था. परिवार का कहना है कि उस समय भी उन्होंने किसी दबाव के आगे झुकना उचित नहीं समझा. इसी तरह छोटे भाई विजय के निधन के बाद उनकी पत्नी गीता ने बैंक ऑफ बड़ौदा में 21 वर्षों तक कैशियर के रूप में सेवा दी. आरोप है कि प्रबंधन स्तर पर उन पर अनावश्यक दबाव बनाया गया और काम न करने जैसे आरोप लगाए गए, जिसके बाद उन्होंने भी नौकरी छोड़ दी.

Advertisement

परिजनों का कहना है कि इन्हीं पारिवारिक मूल्यों के चलते अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को किसी तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. परिवार के अनुसार अलंकार का विरोध बटुकों के साथ कथित रूप से शिखा पकड़कर किए गए व्यवहार को लेकर है.

अलंकार की मां और भाभी भी छोड़ चुकी हैं नौकरी

परिवार ने यह भी कहा कि उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. अलंकार के पिता का निधन तब हो गया था जब वह केवल 10 वर्ष के थे. इसके बाद उन्होंने अपने परिश्रम के बल पर न सिर्फ अपने भाइयों को स्थापित किया, बल्कि स्वयं प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया.

पत्नी और परिवार पूरी तरह साथ, कार्रवाई को बताया अनुचित

परिजनों के अनुसार अलंकार यूजीसी बिल को लेकर भी चिंतित थे. उनका मानना था कि इससे भविष्य में छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. परिवार का यह भी कहना है कि यदि किसी अन्य समुदाय के धार्मिक प्रतीकों, जैसे सिखों की पगड़ी या मुसलमानों की दाढ़ी, के साथ इसी तरह का व्यवहार होता, तो वे उसका भी विरोध करते. अलंकार की पत्नी और पूरा परिवार उनके फैसले के समर्थन में उनके साथ खड़ा है. परिजनों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई उचित नहीं थी और उसी के विरोध में यह निर्णय लिया गया.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement