नोएडा में टूर पैकेज के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का थाना सेक्टर-24 पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने “रेंजर्स क्लब” नाम से कंपनी चलाकर फर्जीवाड़ा करने वाले तीन आरोपियों को सेक्टर-32 स्थित एक मॉल से गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है.
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमरान खान, अभय कुमार और शैलेन्द्र सिंह के रूप में हुई है. ये तीनों खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर लोगों को सस्ते और आकर्षक टूर पैकेज का लालच देते थे. आरोपियों का तरीका बेहद सुनियोजित था, जिसमें वे ग्राहकों को देश-विदेश की यात्रा, लग्जरी सुविधाएं, होटल बुकिंग और अन्य सेवाएं कम कीमत पर उपलब्ध कराने का झांसा देते थे.
खुद को पर्यटन मंत्रालय से जुड़ा बताता था गिरोह
जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को विश्वास में लेने के लिए खुद को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय से जुड़ा हुआ बताते थे. इसके लिए वे फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और नकली एमओयू दस्तावेज तैयार करवाते थे. जिन्हें दिखाकर ग्राहकों को प्रभावित किया जाता था. इसके अलावा फर्जी मोहरों का भी इस्तेमाल किया जाता था, ताकि लोगों को यह लगे कि कंपनी पूरी तरह से वैध और सरकारी मान्यता प्राप्त है.
पुलिस के अनुसार पैसे लेने के बाद आरोपी किसी भी प्रकार की यात्रा या सेवा उपलब्ध नहीं कराते थे. जब ग्राहक संपर्क करने की कोशिश करते थे तो उन्हें टालमटोल किया जाता था या फिर कंपनी के कर्मचारी गायब हो जाते थे. इस तरह यह गिरोह कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका था. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लंबे समय से इस तरह की धोखाधड़ी की योजना बनाई हुई थी और लगातार नए-नए ग्राहकों को फंसाकर पैसा कमाते थे.
पुलिस ने तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा
पुलिस का अनुमान है कि इस गिरोह से जुड़े और भी लोग हो सकते हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 फर्जी आई कार्ड, 180 विजिटिंग कार्ड, 14 फर्जी मोहरें, 15 एमओयू दस्तावेज, 3 मोबाइल फोन, एक क्रेटा कार और 7100 रुपये नकद बरामद किए हैं. यह सभी सामग्री ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में इस्तेमाल की जा रही थी.
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. साथ ही पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोग इस गिरोह के शिकार बने हैं और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं.