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'10 का बिस्कुट' वाले Youtuber शादाब जकाती पर केस दर्ज, महिला ने शारीरिक उत्पीड़न का लगाया आरोप

मेरठ के यूट्यूबर शादाब जकाती के खिलाफ झारखंड की रहने वाली महिला की शिकायत पर इंचौली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है. महिला ने आरोप लगाया है कि उसे बंधक बनाकर रखा गया, घर के काम कराए गए और जान से मारने की धमकी दी गई. पुलिस ने शादाब, पत्नी साजिया और उसके बेटे के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है.

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यूट्यूबर शादाब जकाती के खिलाफ केस दर्ज (Photo: facebook/@Shadab Jakati)
यूट्यूबर शादाब जकाती के खिलाफ केस दर्ज (Photo: facebook/@Shadab Jakati)

मेरठ के मशहूर यूट्यूबर शादाब जकाती एक बार फिर विवादों में आ गए हैं. ₹10 वाला बिस्कुट का पैकेट कितने का है जी से पहचान बनाने वाले शादाब पर झारखंड की रहने वाली एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं. महिला की शिकायत पर पुलिस ने शादाब जकाती, उनकी पत्नी साजिया और बेटे यजीम के खिलाफ इंचौली थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है.

महिला का आरोप है कि शादाब ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. उसे करीब एक साल तक बंधक बनाकर रखा गया. महिला से घर के सारे काम कराए गए और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि शादाब की पत्नी साजिया ने उसके साथ मारपीट और गाली गलौज की.

वीडियो प्रमोशन के बहाने संपर्क में आई थी पीड़िता

महिला ने बताया कि वह साल 2016-2017 में मेरठ आकर रहने लगी थी. उसने मुजफ्फरनगर निवासी युवक से लव मैरिज की थी और इसके बाद इंचौली क्षेत्र में रहने लगी. वह टाइल पत्थर की मजदूरी करती थी जबकि उसका पति बैटरी का काम करता था. इसी दौरान वह यूट्यूब पर रील बनाना भी शुरू कर चुकी थी.

महिला के अनुसार फरवरी 2025 में वह अपने वीडियो प्रमोशन के लिए शादाब जकाती के पास गई थी. शादाब ने उसे भरोसा दिलाया कि वीडियो चल जाएंगे तो मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी और पैसे आने लगेंगे. इसके बाद महिला ने कई रील में उनके साथ काम किया.

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महिला ने आरोप लगाया कि उससे झाड़ू, पोछा और बर्तन तक कराए जाते थे. रात 10 बजे तक काम कराया जाता था और कई बार खाना भी नहीं दिया जाता था. महिला ने शारीरिक शोषण के आरोप भी लगाए हैं. उसने यह भी कहा कि वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी और आत्महत्या का विचार तक आया.

बंधक बनाकर रखने और शारीरिक उत्पीड़न का दावा

पुलिस ने इस मामले में धारा 115(2), 74, 64, 352, 351(3) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया है. मेरठ के एसपी देहात ने बताया कि महिला की शिकायत पर जांच की जा रही है. महिला पहले घर पर काम करती थी और बाद में रील भी बनाई गई. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. वहीं शादाब जकाती ने फोन पर सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है और वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष कहा है.

शादाब ने कहा कि  बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि नेकी कर और दरिया में डाल. जिस महिला ने मुझ पर आरोप लगाए हैं, वह एक दिन मेरे पास मदद मांगने आई थी. उसने कहा था, भाई आप लोगों की मदद करते हो. मैं मजदूरी करती हूं, मेरा एक बच्चा है और मेरी हालत इतनी खराब है कि मैं अपने बच्चे को पढ़ा भी नहीं पा रही हूं. स्कूल तक नहीं भेज पा रही हूं.

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पत्नी साजिया और बेटे पर भी मारपीट के आरोप

मेरी टीम में करीब आठ सदस्य हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं. जिसने पूरी कायनात बनाई है, वह खुदा सब देख रहा है और वही गवाह है. मैंने उस महिला के बच्चे की छह महीने की फीस भरवाई, कोर्स दिलाया और उसके हाथों में किताबें दीं.

पुलिस ने गंभीर धाराओं में दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू

मैंने कई बार उसके लिए राशन भी भरवाया. जब भी उसने किसी मजबूरी का जिक्र किया, कभी पांच हजार, कभी तीन हजार, कभी चार हजार, कभी दो हजार रुपये की मदद की. मैंने कभी मना नहीं किया, सिर्फ यह सोचकर कि वह गरीब है और हमारे साथ कई वीडियो में काम कर चुकी है.

जिस दुकानदार से राशन जाता था, वह भी इसका गवाह है. मेरी टीम का सदस्य जॉनी कुमार भी गवाह है, जो जानता है कि हम गरीब महिलाओं की मदद करते हैं और पूरे महीने का राशन उपलब्ध कराते हैं. आपने हाल ही में देखा होगा कि हमने कंबल भी बांटे थे.

शादाब जकाती ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, वीडियो जारी

मैंने बहुत मेहनत करके यहां तक का सफर तय किया है. अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई है. लेकिन दुख इस बात का है कि लोग मुझे जीने नहीं दे रहे हैं. मेरे खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि मैंने उस महिला को कभी गलत नजर से नहीं देखा और न ही उसे छुआ तक नहीं. मेरे घर में कैमरे लगे हैं और हमेशा आठ-दस लोग मौजूद रहते हैं. कभी ऐसा नहीं हुआ कि वह रात में हमारे घर रुकी हो. ऐसी कोई मिसाल नहीं है.

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मैं चाहता हूं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो. पूरी तहकीकात होनी चाहिए. अगर मेरे खिलाफ जरा सा भी सबूत कोई सामने ला दे, तो मैं खुद को दोषी मान लूंगा. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि लोग मुझसे क्या चाहते हैं. मैंने मेहनत से नाम कमाया है, पैसे भी कमा रहा हूं और उसी से जरूरतमंदों की मदद करता हूं. मेरा पूरा गांव और मोहल्ला इसका गवाह है. सच कहूं तो मेरा मन बहुत दुखी है. आप सभी से बस दुआओं की दरखास्त है.

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