यूपी की लोकसभा सीट बांदा-चित्रकूट में दो जिले बांदा और चित्रकूट आते हैं. महज 2 विधानसभा क्षेत्रों वाला चित्रकूट जिला राजनीतिक दृष्टिकोण से बांदा पर हमेशा भारी रहा है. पिछले 4 दशक से इस सीट पर चुना गया सांसद चित्रकूट या अन्य जिले का निवासी रहा है. 1984 में आखिरी बार कांग्रेस से बांदा जिले के भीष्म देव दुबे सांसद बने थे.
बात करें इस सीट के सियासी समीकरण की तो केन और यमुना नदी के बीच बसे बांदा जिले में सवर्ण और पिछड़ी जातियां निर्णायक होती हैं. कहा जाता है कि इनका वोट जिसकी तरफ जाता है, वही संसद पहुंचता है. बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट से ब्राह्मण और कुर्मी नेताओं को सबसे ज्यादा सांसद बनने का मौका मिला है.
जाति समीकरण की बात करें तो बांदा चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र में ढाई लाख से ज्यादा ब्राह्मण मतदाता हैं. इसी के आसपास कुर्मी यानी पटेल मतदाता हैं. जो हमेशा जीत-हार की दिशा तय करता है. इससे सभी राजनीतिक दल रूबरू हैं. इसलिए ज्यादातर ब्राह्मण या पटेल जाति के ही उम्मीदवार पर दांव लगाती हैं.
इस बार भी भाजपा ने मौजूदा सांसद आरके पटेल पर दांव लगाया है. उधर, सपा (गठबंधन) ने भी कुर्मी जाति से ताल्लुक रखने वाले पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल को उम्मीदवार घोषित किया है. अब आने वाला वक्त बताएगा कि किस पार्टी के प्रत्याशी को सांसद बनने का मौका मिलेगा.
बता दें कि बांदा-चित्रकूट से 1957 में दिनेश सिंह कांग्रेस से, 1962 में सावित्री निगम कांग्रेस, 1967 में जागेश्वर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, 1971 में रामरतन शर्मा जनसंघ, 1977 अंबिका प्रसाद भारतीय लोकदल, 1980 में रामनाथ दुबे कांग्रेस, 1984 में भीष्म देव दुबे कांग्रेस, 1989 में रामसजीवन सिंह बसपा, 1991 में प्रकाश नारायण त्रिपाठी भाजपा, 1996 में रामसजीवन सिंह बसपा, 1998 में रमेश चंद्र द्विवेदी भाजपा, 1999 में रामसजीवन सिंह बसपा, 2004 में श्यामाचरण गुप्ता सपा, 2009 में आर के पटेल सपा, 2014 में भैरो प्रसाद मिश्रा भाजपा, 2019 में आरके पटेल भाजपा से चुनाव जीत चुके हैं.