कानपुर पुलिस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क में शामिल उन डॉक्टरों की तलाश कर रही है जिन्होंने आयुष और पारुल का ऑपरेशन किया था. आरोपी रोहित ने इन डॉक्टरों की व्यवस्था की थी, जो सर्जरी के बाद दो अलग-अलग टैक्सियों से गाजियाबाद और लखनऊ रवाना हो गए.
लखनऊ जाने वाली गाड़ी का ऑनलाइन पेमेंट होने से पुलिस को अहम सुराग मिले हैं, जबकि गाजियाबाद जाने वाली टैक्सी का भुगतान नकद किया गया. डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के नेतृत्व में टीमें मेरठ, नोएडा और देहरादून में दबिश दे रही हैं ताकि इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.
सीसीटीवी बंद और चेहरे पर मास्क
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन से ठीक पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे. टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि डॉक्टर हमेशा चेहरे पर मास्क लगाए रहते थे ताकि उनकी पहचान न हो सके.
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पुलिस को अंदेशा है कि ये डॉक्टर नामी अस्पतालों से जुड़े हो सकते हैं और पैसों के लालच में इस काले धंधे में शामिल हुए. फिलहाल मुख्य कड़ी आरोपी रोहित अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद ही डॉक्टरों के असली नेटवर्क का पता चल सकेगा.
लुकआउट नोटिस जारी, विदेश भागने की आशंका
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. अफजाल, डॉ. रोहित, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ डॉ. अमित के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है. पुलिस को डर है कि ये आरोपी देश छोड़कर भाग सकते हैं, इसलिए उनकी वित्तीय गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है. मेरठ और देहरादून में भी पुलिस की टीमें सक्रिय हैं. यदि इन डॉक्टरों का बड़े अस्पतालों से लिंक साबित होता है, तो कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय है.