उत्तर प्रदेश में कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट के खुलासे के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों- डॉ. रोहित, डॉ. अली और डॉ. अफजाल को वांटेड घोषित कर प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का इनाम रखा है. तीनों अभी फरार हैं और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है. बता दें कि हाल में कानपुर में साइबर अपराधियों से जुड़े किडनी तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. आरोपी टेलीग्राम के जरिए गरीबों को लालच देकर डोनर बनाते थे. फिलहाल पुलिस की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कल्याणपुर में मेड लाइफ सहित चार अवैध अस्पतालों को सील कर दिया है. अब तक इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य संदिग्ध पुलिस के रडार पर हैं.
किडनी बेचने का खेल
मामला 30 मार्च को तब सामने आया था, जब केशवपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. जांच में मालूम हुआ कि बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने बिचौलियों के माध्यम से अपनी किडनी बेची थी, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ.
नोटों की गड्डियों के साथ अफजाल का वीडियो
जांच के दौरान एक वायरल वीडियो ने भी पुलिस की कार्रवाई को तेज कर दिया है. इस वीडियो में डॉ. अफजाल नोटों की गड्डियों के साथ नजर आ रहा है. बताया जा रहा है कि यह वही रकम हो सकती है, जो अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी डील का हिस्सा थी. वीडियो सामने आने के बाद अफजाल की भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है और पुलिस इस एंगल से भी जांच को आगे बढ़ा रही है.
पर्दे के पीछे रहकर नेटवर्क चलाता था रोहित
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का सरगना गाजियाबाद निवासी डॉ. रोहित है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को संचालित करता था. वह ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया देने की भूमिका निभाता था, लेकिन गिरोह की कमान उसी के हाथ में थी. डॉ. अफजाल को नेटवर्क का अहम कड़ी माना जा रहा है, जो मरीजों और डोनर की तलाश कर सौदे तय कराता था. वायरल वीडियो में नोटों के साथ उसकी मौजूदगी ने उसकी भूमिका को और मजबूत कर दिया है. वह मेरठ के एक अस्पताल से भी जुड़ा बताया जा रहा है.
ओटी इंचार्ज समेत 9-10 लोगों की संलिप्तता
वहीं, डॉ. अली उर्फ मुद्दसर अली सिद्दीकी को ओटी टेक्नीशियन बताया गया है, जो ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को अंजाम देता था. पारुल तोमर के ऑपरेशन में भी उसकी सीधी भूमिका सामने आई है. गिरोह में ओटी मैनेजर राजेश कुमार, ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह समेत 9-10 लोगों की संलिप्तता सामने आई है. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, मुख्य आरोपियों पर इनाम घोषित कर दिया गया है और बाकी आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी जारी है.