उत्तर प्रदेश में झांसी के उल्दन थाना क्षेत्र में एक महिला की आत्महत्या ने वैवाहिक प्रताड़ना की भयावह तस्वीर सामने ला दी है. दो बार शादी, दोनों ही रिश्तों में अत्याचार और अंत में टूटी उम्मीदों के साथ मौत को गले लगाना. मायके में रह रही महिला ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.
महिला ने फांसी लगाकर दी जान
उल्दन थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां मायके में रह रही महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज में वैवाहिक प्रताड़ना की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे महिला ने घर के कमरे में खुद को बंद कर लिया. जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों को शक हुआ. दरवाजा खोलने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली. अंततः छत के रास्ते अंदर पहुंचने पर महिला फंदे पर लटकी मिली. यह दृश्य देखकर परिवार में कोहराम मच गया.
पहली शादी में अत्याचार
मृतका के भाइयों संजीव कुमार और चंदू अहिरवार ने बताया कि उनकी बहन सुनीता की जिंदगी लगातार संघर्ष और प्रताड़ना के बीच बीती. उसकी पहली शादी करीब 10-12 साल पहले धवारी गांव में हुई थी, लेकिन वहां ससुराल पक्ष द्वारा लगातार मारपीट और उत्पीड़न किया जाता रहा. हालात इतने बिगड़े कि सुनीता ने मजबूर होकर उस रिश्ते को खत्म कर दिया.
दूसरी शादी में पहले से भी ज्यादा टॉर्चर
परिजनों का कहना है कि परिवार ने नई शुरुआत की उम्मीद में करीब तीन साल पहले उसकी दूसरी शादी गुरसराय थाना क्षेत्र के सिरवो गांव में कराई. लेकिन यहां भी किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया. आरोप है कि दूसरी शादी में उसे पहले से भी ज्यादा खराब माहौल मिला, जहां उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा.
20-25 दिन से मायके में थी सुनीता
बताया जा रहा है कि ससुराल में बढ़ते अत्याचार से तंग आकर सुनीता कुछ समय से मायके में रह रही थी. करीब 20-25 दिन पहले ही वह उल्दन वापस आई थी, लेकिन बीते संघर्षों का बोझ और लगातार मिल रही तकलीफों ने उसे अंदर से तोड़ दिया. घटना वाले दिन घर के अन्य सदस्य खेत पर गए हुए थे. अकेलेपन के बीच सुनीता ने कमरे में फांसी लगाकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर ली. उसकी मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एक महिला कितनी बार अत्याचार सहे और कब तक.
9 साल की मासूम के सिर से उठा मां का साया
इस पूरी घटना में सबसे मार्मिक पहलू उसकी 9 साल की बेटी है, जो अब मां के साये से हमेशा के लिए वंचित हो गई.परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती, तो शायद सुनीता आज जिंदा होती. उनका कहना है कि पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
सूचना मिलते ही उल्दन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.पुलिस ने मृतका के पति को सूचना देकर मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.