scorecardresearch
 

UP: इस विश्वविद्यालय में बड़ा घोटाला, प्रोफेसर ने 5 वर्षों में खरीद दी 33 करोड़ की किताबें

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में किताबों की खरीद फरोख्त में करोड़ों का घोटाला सामने आया है. यहां 5 वर्ष में 33 करोड़ रुपये से ज्यादा की किताबें खरीद ली गईं. लेकिन ये किताबें बच्चों के लिए भी उपलब्ध नहीं हुईं.

Advertisement
X
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में किताबों का बड़ा घोटाला. (File Photo: ITG)
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में किताबों का बड़ा घोटाला. (File Photo: ITG)

जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में किताबों की खरीद फरोख्त में करोड़ों का घोटाला सामने आया है. पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने 5 वित्तीय वर्ष में लगभग 33 करोड़ रुपये की किताब खरीदी है, लेकिन ये किताबें बच्चों को पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाई हैं. वहीं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अपने पिता द्वारा लिखी गई किताबों की हजारों प्रतियां केंद्रीय पुस्तकालय में मंगाई है. इस पूरे मामले पर राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय से आख्या मांगी गई है.

33 करोड़ की खरीदी गई किताबें
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शोध छात्र उद्देश्य सिंह ने विश्वविद्यालय में स्थित स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में किताबों के खरीद फरोख्त को लेकर करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाया है. यह घोटाले के आरोप विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मानस पांडे पर लगे हैं. आरोप है कि प्रोफेसर मानस पांडे ने 2017- 22 के पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 33 करोड़ रुपये की किताबों की खरीद की थी. इनमें से ज्यादातर किताबें सिलेबस की नहीं थी.

इतना ही नहीं बल्कि अपने परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए डॉक्टर मानस पांडे ने अपने पिता की लिखी हुई किताबों की हजारों प्रतियां भी खरीद ली. शिकायतकर्ता उद्देश्य ने बताया कि लाइब्रेरी में बुक्शेल्फ में उनके पिता की लिखी हुई हजारों किताबें पड़ी हुई है. इनमें से ज्यादातर किताबें बच्चों को इशू भी नहीं की जाती हैं.

Advertisement

उद्देश्य का आरोप है कि विश्वविद्यालय में इस दौरान हजारों करोड़ के ई-जनरल्स भी ख़रीदे. लेकिन ई बुक्स और जर्नल्स के एक्सेस छात्रों को नहीं मिले. उद्देश्य का कहना है कि राजभवन और विश्वविद्यालय दोनों ही जांच रिपोर्ट देने में लीपा पोती कर रहे हैं. उसने बताया कि प्रोफेसर मानस पांडे प्रभावशाली व्यक्ति हैं.

2022 से आरटीआई का जवाब नहीं दे रहा विवि
उद्देश्य ने बताया कि कई बार उसने जन सूचना अधिकार और आईजीआरएस के माध्यम से रिपोर्ट मांगी. लेकिन आख्या सौंपने में विश्वविद्यालय आनाकानी कर रहा है. 2022 से यह मामला दबाकर रखा गया है. बार-बार सूचना के अधिकार से मांगने के बाद भी यह रिपोर्ट लगा दिया जाता है कि अभी आख्या अप्राप्त है, अभी उच्च शिक्षा शासन द्वारा कार्यवाही की जायेगी लेकिन कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हो रही है.

उद्देश्य का आरोप है कि यह मामला लगभग 50 करोड़ रुपये का है. उद्देश्य का कहना है कि बगल में आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने की लागत में 50 करोड़ रुपए खर्च हुए. लेकिन पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 50 करोड रुपए की किताबें आई और वह किताबें भी बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं मिल रही है. आख्या का हवाला देते हुए उद्देश्य ने बताया कि आख्या में स्पष्ट लिखा हुआ है कि रेफरेंस नंबर नहीं पड़ने के कारण बुक बच्चों को नहीं उपलब्ध कराई जा सकी है.

Advertisement

कुलपति ने क्या कहा?
उद्देश्य ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में किताबें मंगाने का मतलब आर्थिक लाभ लेना था. विश्वविद्यालय में अप्लाइड साइकोलॉजी में लगभग 30 से 35 छात्र हैं. 10 वर्षों में उतनी आयु नहीं हुई. लेकिन अप्लाइड साइकोलॉजी विभाग के लिए एक करोड़ 60 लाख की किताबें मंगाई गई हैं. उद्देश्य का आरोप है कि इस विश्वविद्यालय ने एक बच्चे पर लगभग 5 से 6 लाख रुपए की किताबें खरीदी हैं.

वह इस मामले में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉक्टर वंदना सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है. प्रोफेसर मानस पांडे से उनका पक्ष मांगा गया है. इसकी जांच राज भवन से भी हुई है. उन्होंने कहा कि पक्ष आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. यह पूछने पर की इतनी बड़ी संख्या में किताबें मनाने में क्या कोई कमीशन खोरी है तो वाइस चांसलर ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहना संभव हो पाएगा.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement