
UP IPS Transfer: उत्तर प्रदेश में बीती रात बड़े स्तर पर आईपीएस अफसरों का तबादला हुआ. शासन द्वारा दर्जन भर से अधिक आईपीएस अफसरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया. इसमें रायबरेली (Raebareli) जिले के एसपी अभिषेक अग्रवाल का नाम भी शामिल है. उनकी जगह यशवीर सिंह को जिले की कानून-व्यवस्था की कमान सौंपी गई है. यशवीर सिंह इससे पहले सोनभद्र में पोस्टेड थे. वहीं, IPS अभिषेक अग्रवाल को नई तैनाती आगरा कमिश्नरेट में मिली है.
बता दें कि ये वही रायबरेली है जहां बीते दिनों लूट केस में एक 'निर्दोष' को जेल भेज दिया गया था. हफ्ते भर से ज्यादा समय तक युवक को जेल में रहना पड़ा था. बाद में खुद पुलिस की जांच में ही उसे 'क्लीन चिट' दी गई और तब जाकर उसकी रिहाई हुई. इस मामले को सपा प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने उठाया था, जिससे रायबरेली पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी. मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.
इससे कुछ दिन पहले रायबरेली के ही लालगंज में सर्राफा व्यवसायी हरिओम के साथ 10 लाख की लूट हुई थी. बदमाशों ने व्यवसायी के चेहरे पर गोली मारकर उसे घायल कर दिया था, फिर पैसों-ज्वैलरी से भरा बैग लेकर भाग गए थे. दो सितंबर को हुई इस वारदात का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है. घटना की जांच-पड़ताल के लिए खुद आईजी स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे. मामले में तत्कालीन एसपी रायबरेली ने हल्का इंचार्ज और सिपाही को सस्पेंड कर दिया था.
शासन ने लिया एक्शन
बहरहाल, अंदरखाने चर्चा है कि लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं और उनके खुलासे में हो रही देरी के चलते शासन स्तर से बड़ा कदम उठाया गया है. इस क्रम में कई जिलों के एसपी का ट्रांसफर किया गया है. कुछ को नए जिले में तैनाती मिल गई तो कुछ को कमिश्नरेट शिफ्ट किया गया है.
गौरतलब हो कि रायबरेली के गदागंज का यह मामला तब हाई प्रोफाइल हो गया जब पीड़ित दीपू का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी की तरफ से अखिलेश यादव ने यूपी सरकार को घेरना शुरू किया.
वहीं, लूट का शिकार हुए व्यापारी रवि शंकर चौरसिया ने भी बताया था कि पकड़े गए आरोपी दीपू की शिनाख्त के लिए उसे थाने बुलाया गया था, लेकिन वह दीपू को नहीं पहचान पाया था. ना ही उसकी वारदात में शामिल होने की पुष्टि की थी. मगर फिर भी पुलिस ने दीपू को जेल भेज दिया.
पीड़ित युवक ने बताई पूरी कहानी
दरअसल, गौरव उर्फ दीपू को लूट के आरोप में 26 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था. विवाद बढ़ने पर सर्किल ऑफिसर से घटना की जांच करवाई गई तो पाया गया कि युवक लूट में नहीं शामिल था. लेकिन जल्दबाजी में स्थानीय पुलिस ने उसे आरोपी बना जेल में डाल दिया.
हुआ यूं कि दीपू को 20 अगस्त को घर लौटते समय एक बैग मिला था इसमें 7 लाख रुपये थे. वो डर गया. तीन दिन तक बैग अपने पास रखे रहा. लेकिन बाद में उसने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के साथ स्थानीय पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना दी. लेकिन पुलिस ने उसी पर लूट का आरोप लगाया और 26 अगस्त को उसे गिरफ्तार कर लिया.
स्थानीय लोगों के आक्रोश के मद्देनजर, पुलिस ने उच्च अधिकारी से जांच कराई और अंततः यह निर्धारित किया कि दीपू लूट/डकैती में नहीं शामिल था. अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि साक्ष्य के अभाव में पुलिस ने दीपू को छुड़ाने की पहल की है. वहीं, स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस ने गुड वर्क दिखाने के चक्कर में जल्दबाजी बरतते हुए एक बेकसुर युवक को जेल भेज दिया. 12 दिन बाद उसकी रिहाई हुई है.
दीपू के मुताबिक, एसओ साहब ने बैग जमा करने के बाद उसे दो दिन तक थाने में बैठाए रखा. फिर जंगल ले गए और वहां पर बैग पकड़ाकर उसका वीडियो बनाया. आखिर में 26 अगस्त को लूट के मामले में फंसाकर जेल भेज दिया.
जिसके साथ लूट हुई, उसने क्या बताया?
वहीं, रवि शंकर चौरसिया (जिसके साथ लूट हुई थी) ने कहा कि उस दिन हम शॉप बंद करके घर जा रहे थे. जैसे ही अपने मोड़ पर पहुंचे वहां पर मास्क लगाए दो अनजान लोग खड़े थे. उन्होंने मेरी बाइक रोक ली और हाथापाई करने लगे. फिर झपट्टा मारकर बैग छीनकर भाग गए.
घटना के तीन दिन बाद में पता चला कि मेरा पैसा मिल गया है. इस बाबत गदागंज SO ने थाने पर बुलाया. थाने में रात के समय दीपू को दिखाया गया और हमसे पूछा गया कि क्या वही शख्स है जिसने लूट की थी? लेकिन मैं उसे पहचान नहीं पाया. इसके बाद पुलिस ने मेरा पैसा लौटाया. लेकिन उसमें 1 लाख कम था. लूट का माल 8 लाख था. बाद में पता चला कि दीपू को जेल भेज दिया गया.
रायबरेली पुलिस ने क्या कहा?
उधर, पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि प्रकरण में वादी की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत किया गया था. घटना घटित होने के पश्चात तत्काल दीपू द्वारा पुलिस को बैग के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई थी, जिसमें उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी. ऐसे में तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्यवाही की गई थी. नव नियुक्त विवेचक द्वारा अन्य तथ्यों व परिस्थितिजनक साक्ष्य का समावेश करते हुए विवेचना की गई और उनकी संलिप्तता नहीं पाई गई जिसके क्रम में पुलिस ने इन्हें रिहा कराया है. वर्तमान में विवेचना प्रचलित है. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और किसी भी निर्दोष के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जाएगी.
किसे मिली, कहां तैनाती?
IPS साद मियां खां को पुलिस उपायुक्त पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर बनाया गया है. आईपीएस चंद्रकांत मीना को पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक नगर बरेली रहे राहुल भाठी को सेनानायक यूपीएसएसएफ लखनऊ के पद पर तैनात किया गया है.

IPS अनिल कुमार यादव को पुलिस उपायुक्त पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ भेजा गया है और IPS अभिषेक भारती को पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज, आईपीएस संदीप कुमार मीना को एसपी रेलवे गोरखपुर और IPS संतोष कुमार मीना को सेनानायक 2वीं वाहिनीपीएसी सीतापुर के पद पर तैनात किया गया है.
IPS लखन सिंह यादव को पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर बनाया गया है. औरैया एसपी चारू निगम को 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद में सेनानायक के तौर पर भेजा गया है.
जबकि, महोबा एसपी अपर्णा गुप्ता को पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ में पुलिस आयुक्त बनाया गया है. वहीं, पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर अशोक कुमार मीना को एसपी सोनभद्र के पद पर तैनाती दी गई है. सोनभद्र एसपी यशवीर सिंह को रायबरेली की कमान सौंपी गई है.
पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज के पुलिस उपायुक्त दीपक भूकर को एसपी उन्नाव बनाया गया है. साथ ही SP रायबरेली अभिषेक कुमार अग्रवाल को आगरा कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त बनाया गया है.