कानपुर के लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में आरोपी शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. ग्वालटोली क्षेत्र की वीआईपी रोड पर हुए इस एक्सीडेंट के बाद से मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ था. करीब 12 करोड़ की लैंबॉर्गिनी कार से टक्कर लगने से कई लोग घायल हुए थे. हादसे के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे जिसमें शिवम कार की ड्राइविंग सीट से निकलता दिखाई दे रहा था. हालांकि, आरोपी पक्ष का कहना है कि कार शिवम नहीं बल्कि ड्राइवर मोहन चला रहा था. मोहन कोर्ट में सरेंडर करने भी पहुंचा था लेकिन जज ने उसे वापस कर दिया. कोर्ट का कहना था कि जब एफआईआर में मोहन का नाम नहीं है तो वो किस बात के लिए सरेंडर करने आया है.
इस बीच शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर डीसीपी अतुल श्रीवास्तव ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 5 टीमें बनाई गई थीं जो लगातार छापेमारी कर रही थी. सुबह-सुबह जानकारी मिली कि शिवम कानपुर में है जिसके बाद टीमों को अलर्ट किया गया और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल, कोर्ट में पेशी और मेडिकल जांच आदि की कार्यवाही कराई जा रही है.
डीसीपी ने क्लियर किया कि हमारी जांच में स्पष्ट है शिवम ही कार चला रहा था. उन्होंने कहा कि कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है. एक्सीडेंट पीड़ित तौफीक के सुलहनामे का संज्ञान लेने का अधिकार कोर्ट का है, जो भी न्यायालय तय करेगा वह मान्य होगा.
कानपुर पुलिस ने बताई अरेस्टिंग की वजह
कानपुर पुलिस ने कोर्ट में खुलासा किया कि 8 फरवरी को हुए हादसे के बाद आरोपी शिवम मिश्रा मौके से फरार हो गया था. अगले दिन जांच को गुमराह करने के लिए एक डमी ड्राइवर का फर्जी हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया गया. पुलिस जांच और साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि गाड़ी शिवम ही चला रहा था.
पुलिस के अनुसार, सात साल से कम सजा वाली धाराओं के बावजूद शिवम को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उसने नोटिस और 35-BS नियमों का पालन नहीं किया. वह जांच में शामिल होने के बजाय छिपता रहा. पुलिस ने अब आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की है.
गौरतलब है कि कानपुर का यह हाई-प्रोफाइल मामला बंशीधर टोबैको ग्रुप के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा से जुड़ी लग्जरी कार दुर्घटना के कारण चर्चा में है. आइये जानते इस घटना के मेन पॉइंट्स-
ड्राइवर पर विवाद: पुलिस का दावा है कि कार शिवम मिश्रा खुद चला रहा था, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि ड्राइवर मोहन लाल गाड़ी चला रहा था. हालांकि, वायरल वीडियो में शिवम ड्राइविंग सीट पर नजर आया.
पहचान छिपाने की कोशिश: हादसे के बाद मौके पर बाउंसर देखे गए, जो कार की नंबर प्लेट हटाने की कोशिश कर रहे थे. उनके पास वॉकी-टॉकी भी थे और वे लोगों को दूर हटा रहे थे.
पुलिस पर कार्रवाई: शुरुआती जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया.
फरारी और जांच: एफआईआर दर्ज होने के बाद जब पुलिस टीम शिवम के घर पहुंची, तो दरवाजा नहीं खोला गया और टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा.