UP News: हापुड़ जिला प्रशासन ने बुधवार सुबह तहसील क्षेत्र के गांव अमीरपुर नगौला में समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष अय्यूब सिद्दीकी के मकान पर बुलडोजर चलाकर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. एडीएम संदीप सिंह और एएसपी की मौजूदगी में भारी पुलिस बल ने सरकारी तालाब की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए यह कार्रवाई की. प्रशासन ने पूर्व में इस तालाब क्षेत्र में बने 42 घरों को नोटिस जारी किया था. कार्रवाई के दौरान ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और विरोध कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बलपूर्वक मौके से हटाया. अय्यूब सिद्दीकी ने हाईकोर्ट से स्टे मिलने का दावा किया है, लेकिन प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया.
तालाब की जमीन और नोटिस का विवाद
हापुड़ के गांव नगौला में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन सख्त नजर आया. एडीएम संदीप कुमार सिंह के अनुसार, सपा नेता अय्यूब सिद्दीकी का मकान सरकारी तालाब की भूमि पर बना हुआ था, जिसे लेकर उन्हें पहले भी कई बार नोटिस दिए जा चुके थे. बुधवार को जब प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ पहुंची, तो पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया. सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को घरों की छतों पर भी तैनात किया गया था.
सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा और पुलिस से झड़प
बुलडोजर की कार्रवाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए. कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर के आगे जमीन पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोंक-झोंक और धक्का-मुक्की भी हुई. आखिरकार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़कर हटाया, जिसके बाद बुलडोजर ने सपा नेता के आलीशान मकान को मलबे के ढेर में बदल दिया.
सपा नेता ने लगाया तानाशाही का आरोप
ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई पर सपा जिला उपाध्यक्ष अय्यूब सिद्दीकी ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें और 42 अन्य लोगों को नोटिस दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी. सिद्दीकी के अनुसार, बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद उन्हें स्टे मिल गया था, लेकिन प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का इंतजार किए बिना ही उनका घर तोड़ दिया. उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को जबरदस्ती और नियमों के विरुद्ध बताया है.
प्रशासन का पक्ष: तालाब में बना था घर
दूसरी ओर, एडीएम संदीप कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है क्योंकि घर तालाब की जमीन पर बना था. हालांकि, उन्होंने मीडिया को आधिकारिक बाइट देने से मना कर दिया, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारियों ने साफ किया कि अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कदम उठाया गया है. गांव में अभी भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल तैनात है.