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गाजियाबाद: लिवर की नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, Liv-52 की 50 हजार टैबलेट जब्त

गाजियाबाद में लिवर की नकली दवाओं को बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है. मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया और करीब 50 हजार टैबलेट बरामद किया है.

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पुलिस गिरफ्तार में नकली दवा कारोबार से जुड़े आरोपी. (Photo: Screengrab)
पुलिस गिरफ्तार में नकली दवा कारोबार से जुड़े आरोपी. (Photo: Screengrab)

गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र में नकली दवाइयों के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. जहां स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और थाना मुरादनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में लिवर की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली Liv-52 (लिव-52) नामक दवा की भारी मात्रा में नकली खेप बरामद की गई है. पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी लंबे समय से नकली दवा बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहे थे.

कंपनी की शिकायत के बाद हुई गिरफ्तारी

इस पूरे मामले में एक नामी दवा कंपनी द्वारा थाना मुरादनगर में शिकायत दर्ज कराई गई थी. जिसमें कहा गया कुछ लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों में उपयोग होने वाली Liv-52 दवा की नकली टैबलेट तैयार कर फर्जी दस्तावेजों, फर्जी जीएसटी नंबर व नकली औषधि लाइसेंस के सहारे बाजार में बेच रहे हैं. शिकायत में यह भी बताया गया कि नकली दवाइयां ट्रांसपोर्ट के जरिए अलग-अलग जगहों और शहरों पर भेजी जा रही हैं. जिससे आम लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है.

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शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीमों का गठन किया गया. पुलिस द्वारा मामले में लगातार की जा रही जांच और मुखबिर की सूचना पर रविवार को स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और मुरादनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयंक अग्रवाल, अनुप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी के रूप में हुई है.

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आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने Liv-52 की 50 हजार नकली टैबलेट, 500 रेपर शीट, 1200 हरे रंग के ढक्कन, 1200 सफेद प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार बरामद की. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह नकली दवाइयां बेहद कम लागत में तैयार की जाती थीं. एक डिब्बी टैबलेट की लागत करीब 35 से 40 रुपये आती थी, जिसे वे करीब 100 रुपये में बाजार में बेचते थे. जबकि असली दवा की कीमत इससे कहीं ज्यादा होती है.

ठीक होने के बजाय खराब हो जाता लिवर

इस तरीके से आरोपी मोटा मुनाफा कमा रहे थे. गिरोह द्वारा डिब्बी, ढक्कन और रेपर अलग-अलग जगहों से तैयार कराए जाते थे. फिर टैबलेट बाहर की लैब से बनवाकर एकत्र की जाती थीं. वहीं स्वास्थ्य  विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार Liv-52 जैसी दवा लिवर की सुरक्षा, पाचन सुधार, फैटी लिवर, शराब के सेवन से होने वाले नुकसान और भूख न लगने जैसी समस्याओं में उपयोग की जाती है.

ऐसी स्थिति में यदि मरीजों को नकली दवा मिलती, तो बीमारी ठीक होने के बजाय लिवर को गंभीर नुकसान भी हो सकता था. इसी कारण यह मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध है. अब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है. जबकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य 6 वांछित आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकली दवाइयों के इस गोरखधंधे को पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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