उत्तर प्रदेश के सैफई स्थित आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है. अस्पताल के मानसिक रोग वार्ड में उपचार करा रही एक 35 साल की मानसिक रूप से अक्षम और मूक-बधिर महिला के साथ रेप का मामला सामने आया है. चौंकाने वाली बात यह है कि जून 2025 से भर्ती इस महिला के 5 महीने की गर्भवती होने का खुलासा 17 मार्च 2026 को एक रूटीन जांच के दौरान हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया.
पीड़िता मूक-बधिर और मानसिक रूप से अक्षम है, इसलिए उसके बयान दर्ज करना एक बड़ी चुनौती थी. अदालत के निर्देश पर दो मूक-बधिर विशेषज्ञों को बुलाया गया, जिनके माध्यम से धारा 164 के तहत महिला के बयान दर्ज किए गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने DNA सैंपल लैब भेजे हैं और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को भी आधार बनाया गया है.
जांच कमेटियों की रिपोर्ट
विश्वविद्यालय के कुल सचिव दीपक वर्मा ने बताया कि मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी. कार्य समिति की हालिया बैठक में तीन अलग-अलग कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
मेडिकल टीम ने पीड़ित महिला के स्वास्थ्य और गर्भपात की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की है. अब सारा दारोमदार कोर्ट के आदेश पर है.
आरोपी की गिरफ्तारी और विरोधाभासी दावे
प्रारंभिक जांच और विभाग प्रमुख की रिपोर्ट के आधार पर वार्ड के सफाई कर्मचारी रविंद्र कुमार वाल्मीकि निवासी बकेवर को मुख्य आरोपी माना गया है. पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. मीडिया के सामने आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए महिला को अपनाने की बात कही थी.
दूसरी ओर, रविंद्र की पत्नी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति को बंधक बनाकर और मारपीट कर यह बयान दिलवाया गया है, जबकि वह निर्दोष है.
यह मामला सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीतर महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है. फिलहाल, डीएनए रिपोर्ट और अदालत के फैसले का इंतजार है, जिससे इस खौफनाक वारदात की पूरी सच्चाई सामने आ सके.