
कोडिन कफ सिरप तस्करी मामले में बड़ी गिरफ्तारी हुई है. मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल का सबसे करीबी विकास सिंह नर्वे पुलिस की गिरफ्त में आ गया है. उसे इंडो-नेपाल बॉर्डर से धर दबोचा गया. विकास वही शख्स है जिसने शुभम जायसवाल को अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह 'सिपाही' से मिलवाया था.
आपको बता दें कि विकास सिंह नर्वे पर यूपी के आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों में केस दर्ज हैं. काफी टाइम से STF भी उसकी तलाश कर रही थी. इस बीच जैसे ख़ुफ़िया इनपुट मिले पुलिस ने सिरप तस्करी के आरोपी विकास को गिरफ्तार कर लिया.
आपको बता दें कि वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने कोडिन कफ सिरप तस्करी के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के मुख्य सहयोगी विकास सिंह नर्वे को सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार कर लिया है. विकास इस रैकेट की वह अहम कड़ी था जिसने शुभम जायसवाल को बड़े तस्करों (अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह) से मिलवाकर धंधे को अंतरराज्यीय स्तर पर फैलाया.
जानिए अहम पॉइंट्स-
नेटवर्क और कमाई: विकास ने वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ और जौनपुर में फर्जी नाम-पते पर कंपनियां खोलकर करोड़ों की अवैध संपत्ति अर्जित की.

सियासी महात्वाकांक्षा: अमित टाटा और आलोक की तरह विकास भी आजमगढ़ से ब्लॉक प्रमुख बनने की तैयारी कर रहा था और चुनाव लड़ने वाला था.
गिरफ्तारी: एसटीएफ को दिए गए साथी आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस काफी समय से इसकी तलाश में थी। आज़मगढ़ के नरवे गांव का रहने वाला विकास इस काले धंधे का दूसरा सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, 30 साल का विकास सिंह नर्वे, आजमगढ़ के बरदह थानाक्षेत्र के नर्वे गांव का रहने वाला है. इसने कुछ सालों में ही बड़ी संपत्ति बनाई है. लखनऊ के चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड में सामने आए आजमगढ़ के कई सफेदपोश लोगों का यह बेहद करीबी बताया जाता है. विकास का नाम तब चर्चा में आया जब अमित टाटा की गिरफ्तारी के बाद उसके बारे में पूछताछ हुई.