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गाजियाबाद: 3 BHK फ्लैट के एक ही कमरे में 3 पत्नी और पांच बच्चों के साथ सोता था चेतन, नए खुलासे से हर कोई हैरान 

गाजियाबाद के भारत सिटी सोसायटी में तीन बहनों के एक साथ सुसाइड वाले मामले में जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात पुलिस को पता चली है. बताया जा रहा है कि 3 BHK फ्लैट के एक ही कमरे में चेतन अपने पूरे परिवार के साथ रहता था. जहां चेतन और उसकी तीनों पत्नी, पांच बच्चे एक साथ रहते थे. पहले जिस स्कूल में बच्चियां पढ़ती थी वहां भी टीचरों से पूछताछ होगी कि आखिर तीनों बहनों का नेचर कैसा था, क्यों उन्होंने पढ़ाई छोड़ी.

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गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड केस में पिता की कहानी में रोज एक नए खुलासे हो रहे हैं (Photo: ITG)
गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड केस में पिता की कहानी में रोज एक नए खुलासे हो रहे हैं (Photo: ITG)

गाजियाबाद के भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में पुलिस जांच के साथ नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं. नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली बच्चियों के पिता चेतन कुमार की पारिवारिक स्थिति, उसकी तीन शादियां, एक प्रेमिका के अलावा आर्थिक हालात और बच्चों की पढ़ाई छूटने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है. पुलिस के अनुसार, 3 BHK फ्लैट में पूरे परिवार का एक ही कमरे में रहना, पिता के विरोधाभासी बयान इस मामले में अहम कड़ियां मानी जा रही हैं.

एक फ्लैट, एक कमरा और पूरा परिवार

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि भारत सिटी सोसायटी के जिस 3 BHK फ्लैट में चेतन अपने परिवार के साथ रह रहा था, उसमें तीन बेडरूम होने के बावजूद पूरा परिवार एक ही कमरे में सोता था. चेतन, उसकी तीन पत्नियां और पांच बच्चे सब एक ही कमरे में रहते थे. यह जानकारी पुलिस अधिकारियों के लिए भी हैरान करने वाली थी. जब पूछताछ के दौरान चेतन से सवाल किया गया कि देर रात तीनों बच्चियां कमरे से बाहर कैसे निकलीं और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी, तो उसने इसे सामान्य दिनचर्या बताया. यही जवाब अब पुलिस के लिए शक की बड़ी वजह बन गया है. एक ही कमरे में इतने लोगों के बीच तीन नाबालिग बच्चियों का चुपचाप बाहर निकल जाना क्या यह वाकई सामान्य था, या परिवार के भीतर की उदासीनता का संकेत है ?

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तीन शादियां, उलझी टाइमलाइन और विरोधाभासी बयान

चेतन की निजी जिंदगी पुलिस जांच का सबसे पेचीदा हिस्सा बन चुकी है. वह पहले ही यह स्वीकार कर चुका है कि उसने तीन शादियां की हैं. उसके अनुसार, पहली शादी सुजाता से वर्ष 2010 में हुई, दूसरी शादी हिना से 2013 में और तीसरी शादी टीना से 2018 के आसपास. लेकिन जब पुलिस ने इन दावों को उम्र और बच्चों के जन्म के आंकड़ों से मिलाया, तो पूरी टाइमलाइन ही डगमगाने लगी. सुजाता से उसकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र करीब 16 साल बताई जा रही है, जो इस दावे पर सवाल खड़े करती है कि पहली पत्नी से बच्चे न होने के कारण उसने दूसरी शादी की थी. सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब तीसरी पत्नी टीना को लेकर चेतन के बयान बदले-बदले नजर आए. शुरुआत में उसने पुलिस से कहा कि टीना उसकी पत्नी नहीं, बल्कि उसकी साली है. लेकिन पूछताछ आगे बढ़ने पर उसने स्वीकार किया कि टीना से उसने शादी की है. टीना की उम्र करीब 22 साल बताई जा रही है और उससे चेतन की एक तीन साल की बेटी भी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चेतन के बयान बार-बार बदल रहे हैं, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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दस्तावेज नहीं, तारीखें याद नहीं

पुलिस ने जब शादियों से जुड़े दस्तावेज मांगे, तो मामला और उलझ गया. न तो शादी कोई पुख्ता जानकारी और न ही पत्नियां शादी की सही तारीखें बता पा रही हैं. सुजाता और हिना दोनों अशिक्षित हैं और पुलिस को यह भी नहीं बता पा रहीं कि उनकी शादी किस साल या किस महीने हुई थी. अब पुलिस मंदिरों, स्थानीय लोगों और संभावित गवाहों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये शादियां कब और किन परिस्थितियों में हुईं. अधिकारियों का मानना है कि पारिवारिक ढांचे की यह अव्यवस्था बच्चियों के मानसिक हालात पर गहरा असर डाल सकती है.

पढ़ाई छूटी, सपने टूटे

तीनों नाबालिग बहनों की मौत के बाद एक और दर्दनाक सच सामने आया है. बच्चियां स्कूल नहीं जाती थीं. शुरुआती जांच में पता चला है कि आर्थिक तंगी के चलते उनकी पढ़ाई कई साल पहले बंद कर दी गई थी. चेतन का दावा है कि बच्चियां पढ़ाई में कमजोर थीं और लगातार फेल हो रही थीं, इसलिए स्कूल जाना छूट गया. लेकिन पुलिस इस दावे को आंख मूंदकर स्वीकार करने के मूड में नहीं है. अब यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चियां किस स्कूल में पढ़ती थीं, आखिरी बार किस कक्षा तक पहुंचीं और किन हालात में उनकी पढ़ाई बंद हुई. पुलिस स्कूल प्रबंधन से संपर्क कर यह भी जांच करेगी कि क्या बच्चियां सच में पढ़ाई में कमजोर थीं या घर के हालात ने उन्हें स्कूल से दूर कर दिया.

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बिके हुए मोबाइल और गायब सुराग

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चियों के पास पहले दो मोबाइल फोन थे. चेतन ने पुलिस को बताया कि कर्ज में डूबे होने के कारण उसने दोनों फोन बेच दिए. एक मोबाइल करीब छह महीने पहले और दूसरा घटना से सिर्फ 15 दिन पहले बेचा गया था. ये दोनों फोन अब पुलिस के लिए अहम सबूत बन चुके हैं. पुलिस उनके IMEI नंबर के जरिए ट्रैकिंग कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि अगर फोन फॉर्मेट कर दिए गए होंगे, तो डेटा रिकवरी मुश्किल हो सकती है, लेकिन तकनीकी टीम हर संभव कोशिश कर रही है. मोबाइल फोन से बच्चियों की मानसिक स्थिति, उनके संपर्क और किसी संभावित दबाव के सुराग मिल सकते हैं.

आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव

पुलिस सूत्रों के मुताबिक चेतन पहले गाजियाबाद में क्रेडिट कार्ड बनवाने का काम करता था. आय स्थिर नहीं थी और परिवार लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा था. किराया, बच्चों का खर्च, रोजमर्रा की जरूरतें सब कुछ किसी तरह चल रहा था. तीन शादियां, पांच बच्चे और सीमित आय. पुलिस का मानना है कि इस माहौल में बच्चियों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता गया. पढ़ाई छूटने के बाद उनका दायरा और सीमित हो गया था. 

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पुलिस जांच का फोकस

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ आत्महत्या का नहीं, बल्कि परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है. पारिवारिक माहौल, पिता की तीन शादियां, आर्थिक बदहाली, शिक्षा से दूरी, मानसिक तनाव इन सभी पहलुओं को जोड़कर जांच की जा रही है.

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