केंद्र सरकार द्वारा बजट 2026 पेश किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट और शेयर बाजार में आई गिरावट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा, 'आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम.'
अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता. उनके मुताबिक भाजपा का हर बजट सीमित वर्ग के लिए होता है और इसमें व्यापक जनहित की झलक नहीं दिखती. उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद टैक्स में राहत नहीं दी गई, जिससे मध्यम वर्ग और आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा.
बेरोजगार युवाओं, किसानों, मजदूरों के लिए कुछ नहीं: अखिलेश
सपा प्रमुख ने कहा कि बजट में बेरोजगार युवाओं, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और वंचित वर्ग के लिए ठोस प्रावधान नजर नहीं आते. उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि सामाजिक सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं.
हालांकि सरकार का दावा है कि बजट विकास, निवेश और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है. बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है.
अखिलेश यादव ने क्या लिखा?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम. हमने तो पहले ही कहा था, सवाल ये नहीं है कि शेयर नजर रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा. जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी. हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बंटे बीस) का बजट मानते हैं, क्योंकि वो 5% लोगों के लिए होता है. भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है. भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है.'
अखिलेश यादव ने आगे लिखा, '2026 बजट में इस बजट में न आम जनता का जिक्र है न फ़िक्र. महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है. अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं, लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है. मध्यम वर्ग अपने को ठगा महसूस कर रहा है. शोषित, वंचित, ग़रीब व्यक्ति जहां था उससे भी नीचे जाता दिख रहा है. इस बजट ने उसके चादर में पैबंद लगाने की जगह, उसे और चिथड़ा कर दिया है, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा शाब्दिक औपचारिकता तक सीमित होकर रह गयी है. किसान, मज़दूर, श्रमिक, कारोबारी, छोटा दुकानदार अपने लिए मिली राहत को दूरबीन लेकर भी ढूंढ नहीं पा रहा है. निराशाजनक, निंदनीय बजट!'
बता दें कि 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश किया. बजट के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. विपक्षी नेताओं ने और आर्थिक मामलों के जानकारों ने बजट पर अपनी राय जाहिर की है.