'भैया, प्लीज मुझे माफ कर दो… गलती हो गई… अब मुझे कुछ नहीं कहना' यह आवाज है आयुष कुमार की, जो इस वक्त आईसीयू में भर्ती है. बिहार का रहने वाला यह एमबीए छात्र अब अपने फैसले को लेकर भीतर से टूट चुका है. पुलिस के मुताबिक, जब भी उससे बात की जाती है या परिवार को सूचना देने की बात सामने आती है, वह भावुक हो जाता है. उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह हाथ जोड़कर विनती करने लगता है कि उसकी मां को इस बारे में कुछ न बताया जाए. इस रैकेट का खुलासा होते ही मीडिया जब आयुष से बात करने पहुंची तभी वह कह रहा था भैया प्लीज रहने दो गलती हो गई है.
हर बातचीत में एक ही डर
आईसीयू के बेड पर लेटे आयुष की सबसे बड़ी चिंता उसका परिवार है. उसने घर से निकलते समय यह कहा था कि वह नौकरी के सिलसिले में कानपुर जा रहा है. परिवार को इस बात की भनक तक नहीं है कि यहां आकर उसने क्या कदम उठा लिया. पुलिस के अनुसार, जब भी परिवार को सूचना देने की बात होती है, आयुष रो पड़ता है. वह बार-बार कहता है मां को मत बताना… उनसे यह सब सहा नहीं जाएगा. उसके चेहरे पर उस डर की छाया साफ दिखाई देती है, जिसे वह शब्दों में ठीक से बयां भी नहीं कर पा रहा.
महिला मित्र से मुलाकात में टूट गया संयम
पूछताछ के दौरान पुलिस ने उसकी महिला मित्र को भी बुलाया, जो देहरादून में उसके साथ पढ़ती है. वह कानपुर पहुंची और पुलिस की निगरानी में दोनों की मुलाकात कराई गई. जैसे ही आयुष ने उसे देखा, उसका संयम टूट गया. वह भावुक हो गया और अपनी गलती को स्वीकार करते हुए बार-बार पछतावा जताने लगा. दोनों देहरादून की एक यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते हैं. कुछ देर की यह मुलाकात, वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक पल बन गई.
हाथ पर ‘I Love You Mom’ और आंखों में डर
आयुष के हाथ पर I Love You Mom का टैटू बना हुआ है. पूछताछ के दौरान उसने खुद बताया कि वह अपनी मां से बेहद प्यार करता है. यही वजह है कि वह इस बात से सबसे ज्यादा घबराया हुआ है कि जब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मिलेगी, तो क्या होगा. उसकी बातचीत में बार-बार मां का जिक्र आता है, और हर बार उसकी आवाज धीमी पड़ जाती है. आयुष ने पुलिस को बताया कि वह देहरादून की एक यूनिवर्सिटी में एमबीए कर रहा है. पिछले दो महीनों से वह फीस जमा नहीं कर पा रहा था. पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं और आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी. उसने बताया कि जमीन पहले से गिरवी थी, जिसके कारण उसे लोन भी नहीं मिल पा रहा था. फीस और अन्य खर्चों का बोझ उसके लिए लगातार चिंता का कारण बना हुआ था. पूछताछ में आयुष ने यह भी बताया कि वह साइबर ठगी के जाल में फंस गया था. उसने म्यूल अकाउंट तक खुलवाया, लेकिन वहां से उसे कोई फायदा नहीं हुआ. हालात सुधरने के बजाय और जटिल होते चले गए. इसी दौरान एक एजेंट से उसका संपर्क हुआ, जिसने उसे किडनी बेचने के लिए तैयार किया. आयुष के मुताबिक, 6 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था. आधी रकम पहले और बाकी ऑपरेशन के बाद देने की बात कही गई थी.
ऑपरेशन के बाद सिर्फ साढ़े तीन लाख ही मिले
आयुष ने पुलिस को बताया कि ऑपरेशन के बाद उसके खाते में केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही आए. बाकी रकम अब तक नहीं मिली है. जिस उम्मीद के साथ उसने यह कदम उठाया था, वह पूरी नहीं हुई. अब वह बार-बार इसी बात को दोहराता है कि उससे गलती हो गई. उसकी बातचीत में यह पछतावा साफ झलकता है. ऑपरेशन के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उसे कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस के अनुसार, उसकी हालत देखकर कई लोग भावुक हो रहे हैं. वह ज्यादा बात नहीं करता, लेकिन जब भी करता है, उसकी आवाज में पछतावा और डर साफ महसूस होता है.
डॉक्टर और टेक्नीशियन की गिरफ्तारी से खुली परतें
इस मामले में गाजियाबाद के ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप की गिरफ्तारी के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. पूछताछ में उन्होंने बताया कि डॉ. रोहित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ है, जो ऑपरेशन के दौरान मरीजों को बेहोश करता था. वहीं, दिल्ली के द्वारका का रहने वाला डॉ. अली सर्जरी करता था. वह अपनी टीम के साथ आता था, जिसमें एक अन्य डॉक्टर और दो सहायक शामिल रहते थे. ऑपरेशन के बाद पूरी टीम अलग-अलग जगहों के लिए निकल जाती थी. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, राजेश कुमार ने बताया कि तीन साल पहले गाजियाबाद के वैशाली अस्पताल में एक सेमिनार के दौरान उसकी मुलाकात डॉ. रोहित से हुई थी. बाद में कुलदीप के साथ मिलकर उसने इस काम में जुड़ने का फैसला किया. राजेश के मुताबिक, जनवरी से अब तक पांच किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं. ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी डॉ. अली निभाता था, जबकि अन्य लोग उसकी मदद करते थे.
मेरठ तक जुड़े तार, अस्पताल को नोटिस
जांच के दौरान इस मामले के तार मेरठ से भी जुड़ते नजर आए हैं. मेरठ के एक अस्पताल का नाम सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है. सीएमओ की ओर से अस्पताल को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है. नोटिस में उन नामों का भी जिक्र किया गया है, जो इस मामले में सामने आए हैं. पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है. वहीं, संबंधित अस्पताल के मैनेजर सचिन का कहना है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. उनका कहना है कि खबरों में उनका नाम जोड़ा जा रहा है, जबकि उनके यहां ऐसा कोई डॉक्टर नहीं है, जिसका जिक्र किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पुलिस भी अस्पताल आई थी और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें नोटिस मिला है. अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों से इनकार किया है.
सीएमओ बोले जांच के बाद होगी कार्रवाई
मेरठ के सीएमओ डॉक्टर अशोक कटारिया ने बताया कि समाचारों में अस्पताल का नाम सामने आने के बाद नोटिस जारी कर जानकारी मांगी गई है. तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जांच में किसी की संलिप्तता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.