Uttar Pradesh News: बरेली के थाना बारादरी पुलिस ने फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वाली दो सगी बहनों को गिरफ्तार किया है. इनमें से मुख्य आरोपी विप्रा मिश्रा खुद को गजरौला में तैनात एडीएम एफआर (ADM FR) बताती थी, जबकि उसकी बहन शिखा भी इस खेल में शामिल थी.
इन दोनों ने मिलकर बरेली और आसपास के इलाकों में कई युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये का चूना लगाया. पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों को पकड़ा. बारादरी थाना अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने फोन पर बताया कि महिलाओं के खिलाफ ठगी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
सचिवालय में रसूख और फर्जी पद का रौब
ग्रीन पार्क निवासी विप्रा मिश्रा बड़ी ही चालाकी से लोगों को अपने जाल में फंसाती थी. वह पहले खुद को सचिवालय से जुड़ा बताती और फिर गजरौला में एडीएम एफआर पद पर अपनी तैनाती का दावा कर लोगों पर धौंस जमाती थी.
वह युवाओं से दोस्ती कर उन्हें यह भरोसा दिलाती थी कि उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है और वह किसी को भी सरकारी विभाग में फिट करवा सकती है. उसकी बातों में आकर बेरोजगार युवक अपनी मेहनत की कमाई उसे सौंप देते थे.
कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी के नाम पर 5 लाख की ठगी
ठगी का शिकार हुए किला थाना क्षेत्र के मलूकपुर निवासी मुसाहिद ने बताया कि विप्रा ने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था. इसके बदले उसने मुसाहिद से अलग-अलग किस्तों में कुल 5 लाख 21 हजार रुपये ऐंठ लिए. जब महीनों बीत जाने के बाद भी मुसाहिद को नियुक्ति पत्र नहीं मिला और विप्रा बहाने बनाने लगी, तब उसे शक हुआ. जांच करने पर पता चला कि विप्रा कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक जालसाज है.
दोनों बहनें मिलकर चलाती थीं ठगी का नेक्सस
पुलिस जांच में सामने आया है कि विप्रा की बहन शिखा भी इस गिरोह का हिस्सा थी. दोनों बहनें मिलकर पीड़ितों को अपनी फर्जी पहचान के जरिए डराती-धमकाती भी थीं. उन्होंने खुद को कभी आईएएस तो कभी एसडीएम बताकर कई लोगों को निशाना बनाया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दोनों ने अब तक कुल कितने लोगों से कितनी रकम ठगी है. फिलहाल दोनों आरोपी बहनें पुलिस की गिरफ्त में हैं और आगे की विधिक कार्यवाही की जा रही है.