यूपी के बरेली में तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने निलंबन का आदेश मानने से इनकार कर दिया है. अग्निहोत्री ने कहा कि जब मैं पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं तो निलंबन का कोई मतलब नहीं रह जाता है. इसके साथ ही उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने से भी मना कर दिया है. उनका कहना है कि वो शामली कार्यालय से अटैच नहीं होंगे.
आपको बता दें कि बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन का निलंबन आदेश मानने से इनकार करते हुए साफ किया है कि वे पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में SIT जांच की मांग की है.
अग्निहोत्री का आरोप है कि जिलाधिकारी आवास पर उन पर दबाव बनाया गया और एक फोन कॉल के दौरान उन्हें 'पागल ब्राह्मण' कहकर अपमानित किया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि वह कॉल किसकी थी और उस व्यक्ति पर कार्रवाई की मांग की. अग्निहोत्री अपने स्टैंड पर कायम हैं कि उन्होंने 'समाज के सम्मान' के लिए पद त्यागा है.
पिछले 24 घंटों का घटनाक्रम-
इस्तीफे का ऐलान: 26 जनवरी को अग्निहोत्री ने 5 पन्नों का पत्र लिखकर इस्तीफे की घोषणा की, जिसके समर्थन में ब्राह्मण सभा और कई सवर्ण बीजेपी नेता भी उतर आए.
गंभीर आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास पर 45 मिनट तक 'बंधक' बनाकर रखा गया, मानसिक दबाव दिया गया और लखनऊ से आए एक फोन कॉल पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.
प्रशासन का पक्ष: जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट को केवल सामान्य प्रशासनिक चर्चा के लिए बुलाया गया था, कोई दबाव नहीं बनाया गया.
शासन की कार्रवाई: शासन ने अनुशासनहीनता के आधार पर अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन्हें शामली डीएम कार्यालय से अटैच कर दिया गया है और पूरे मामले की विभागीय जांच बरेली मंडल के आयुक्त को सौंपी गई है.