Uttar Pradesh News: बाराबंकी में अधिवक्ता और मुख्तार अंसारी के करीबी रहे शोएब किदवई उर्फ बॉबी की बदमाशों ने तीन तरफ से घेरकर हत्या कर दी. हमलावरों ने लगभग 3 फीट की दूरी से उसपर 20 राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से 10 गोली शोएब को लगीं. वारदात के दौरान प्रतिबंधित 9mm बोर और .32 बोर की पिस्टल का इस्तेमाल किया गया. शूटरों ने भागने से पहले यह सुनिश्चित किया कि सीट पर घायल पड़े बॉबी की मौत हो चुकी है. पुलिस अब बॉबी के ड्राइवर, दो करीबियों और लखनऊ में एक पूर्व ब्लॉक प्रमुख के साथ हुए जमीन के सौदे को लेकर पूछताछ कर रही है.
जेलर हत्याकांड से चर्चा में आया था बॉबी
शोएब उर्फ बॉबी महज 23 साल की उम्र में तब चर्चा में आया था, जब 4 फरवरी 1999 को लखनऊ में जेल अधीक्षक आरके तिवारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी. इस हाई-प्रोफाइल मामले में बॉबी का नाम मुख्य शूटर के तौर पर सामने आया था. इसके ठीक एक साल बाद, साल 2000 में बाराबंकी के डॉक्टर डीवी सिंह की उनके अस्पताल में घुसकर हत्या करने के मामले में भी बॉबी को नामजद किया गया था. हालांकि, साक्ष्य के अभाव में वह इन दोनों ही बड़े मुकदमों से बरी हो गया था.
9mm की गोलियों से दहला इलाका
वारदात वाली जगह से पुलिस को 14 खोखे और एक जिंदा कारतूस मिला है, जिनमें दो खोखे प्रतिबंधित 9mm और 13 खोखे .32 बोर के हैं. हमलावरों ने शोएब को बचने का कोई मौका नहीं दिया. जांच में सामने आया है कि लखनऊ की एक लैंड डील को लेकर पूर्वांचल के एक पूर्व ब्लॉक प्रमुख से शोएब के रिश्ते थे. पुलिस की पड़ताल अब इसी जमीन के सौदे और पुरानी रंजिशों पर टिक गई है. बॉबी हमेशा मुख्तार अंसारी का भरोसेमंद माना जाता रहा है.
ड्राइवर और करीबियों से पुलिस की पूछताछ
हत्याकांड के वक्त बॉबी के साथ रहने वाले ड्राइवर और उसके दो अन्य करीबियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस को शक है कि हमलावरों को शोएब की सटीक लोकेशन की जानकारी थी. 20 राउंड फायरिंग के बाद बदमाशों ने शव को चेक किया, जो उनके पेशेवर शूटर होने की ओर इशारा करता है. फिलहाल बाराबंकी पुलिस की कई टीमें फरार हमलावरों की तलाश में दबिश दे रही हैं और जमीन से जुड़े विवादों की फाइलों को खंगाला जा रहा है.
शनिवार शाम भारी सुरक्षा के बीच शोएब को पैतृक गांव गढ़िया में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. इस दौरान 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे. शोएब के वकील होने के कारण उनके साथियों ने जिला अस्पताल और बस अड्डे पर प्रदर्शन कर जाम लगाया. एसपी के समझाने के बाद वकील शांत हुए और प्रार्थना पत्र देकर 48 घंटे के भीतर हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की.