यूपी के बांदा से सामने आया यह मामला झकझोर देने वाला है. यहां रहने वाले पति-पत्नी ने करीब 10 साल तक 33 बच्चों का शोषण कर उनके घिनौने वीडियो बनाए, डार्क वेब के जरिए 47 देशों तक बेचे. पति सिंचाई विभाग का पूर्व जूनियर इंजीनियर है, उसके काम में उसकी पत्नी भी साथ देती थी. इस नेटवर्क में मासूमों को लालच और डर के जरिए फंसाया जाता था. गहन जांच और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए दोनों को मौत की सजा सुनाई.
साल 2020... सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे एक खौफनाक कहानी चल रही थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट की निगरानी के दौरान कुछ संदिग्ध डिजिटल एक्टिविटीज सामने आईं. यह जानकारी इंटरपोल के जरिए भारत की जांच एजेंसियों तक पहुंची. जब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) ने इस इनपुट को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की, तो जो सामने आया, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया.
जांच में सामने आया कि अपराधी सरकारी सिस्टम का हिस्सा रहा एक व्यक्ति था... सिंचाई विभाग का जूनियर इंजीनियर रामभवन. उसके साथ उसकी पत्नी भी इस घिनौने अपराध में शामिल थी. दोनों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जो सालों तक बच्चों का शोषण करता रहा.

कैसे फंसाए जाते थे मासूम?
यह कहानी यहां और भी डरावनी हो जाती है. इंजीनियर बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था. कभी ऑनलाइन गेम खेलने का लालच, कभी पैसे या छोटे-छोटे गिफ्ट्स... और फिर शुरू होता था घिनौना, बेहद डरावना और शोषण का सिलसिला. कई बार बच्चों को डराकर और ब्लैकमेल कर इस अपराध को अंजाम दिया गया. यह सब एक-दो बार नहीं, बल्कि लगभग एक दशक तक चलता रहा... 2010 से 2020 के बीच.
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जांच के दौरान जब इंजीनियर के ठिकानों पर छापेमारी हुई, तो वहां से भारी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद हुए. पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और अन्य उपकरणों में बच्चों के साथ किए गए घिनौने कृत्य, शोषण के वीडियो और तस्वीरें मिलीं. बताया गया कि 30 से अधिक बच्चों के वीडियो और सैकड़ों आपत्तिजनक तस्वीरें बरामद हुईं. ये कंटेंट कलेक्शन के लिए नहीं था... इसे इंटरनेट के जरिए विदेशों तक भेजा जा रहा था. लगभग 47 देशों में यह वीडियो भेजे गए.

क्राइम ने बदल दी मासूमों की जिंदगी
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू वे मासूम बच्चे हैं, जिनकी जिंदगी इस अपराध ने हमेशा के लिए बदल दी. कुछ बच्चे इतने छोटे थे कि उनकी उम्र महज 3 साल तक बताई गई. कई बच्चों को शारीरिक चोटें आईं, कुछ को अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ा. पीड़ितों के साथ शारीरिक घाव, मानसिक जख्म... डर, शर्म और ट्रॉमा- ये सब उनके साथ आज भी जुड़े हुए हैं.
साल 2020 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस
CBI ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अक्टूबर 2020 में केस दर्ज किया. गहन जांच के बाद फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की गई. इस दौरान 74 गवाहों को अदालत में पेश किया गया. आखिरकार, पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' कैटेगरी में रखते हुए इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी को दोषी करार दिया.

CBI के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि केस की इन्वेस्टिगेशन के दौरान सामने आया कि दोनों ने कई तरह की गलत हरकतें की थीं, जिसमें पीड़ितों के साथ गंभीर सेक्सुअल असॉल्ट शामिल थे. कुछ बच्चों की उम्र तीन साल भी थी.
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इन्वेस्टिगेशन में यह भी पता चला कि कुछ विक्टिम्स के प्राइवेट पार्ट्स में सेक्सुअल असॉल्ट के दौरान चोटें आई थीं. उनमें से कुछ अभी भी हॉस्पिटल में हैं. कुछ विक्टिम्स की आंखें टेढ़ी हो गई हैं. विक्टिम्स अभी भी साइकोलॉजिकल ट्रॉमा से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि दोनों 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के इलाके में एक्टिव रहे.

कोर्ट के सरकारी वकील ने क्या बताया?
कोर्ट के सरकारी अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने बताया कि मामला अक्टूबर 2020 का है. सीबीआई को सूचना मिली थी कि इंटरपोल के माध्यम से बच्चों का यौन शोषण करके उनका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड किया जा रहा है. पेन ड्राइव में 33 बच्चों के वीडियो मिले थे, सैकड़ों फोटो थीं, जिसके बाद CBI ने केस दर्ज किया था. जांच शुरू की गई.
चार्जशीट, 74 गवाह और 160 पेज में कोर्ट का फैसला
फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की. 74 गवाह पेश किए. CBI ने जेई रामभवन और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर किया था. अब अदालत ने 160 पेज के फैसले में फांसी की सजा सुनाई है.
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाए रखा जाए, जब तक इनकी मौत न हो जाए. इसी के साथ प्रदेश सरकार को आदेश दिया गया है कि पीड़ितों को दस-दस लाख का मुआवजा दिया जाए. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हर पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित किया जा सके.