ईरान युद्ध के चलते पूरी दुनिया में तनाव है. एलपीजी गैस और तेल की सप्लाई बाधित हो रही है. इसका असर आम लोगों पर भी पड़ना शुरू हुआ है. यूपी के अयोध्या में 'राम रसोई' प्रभावित हुई है. मंदिर के प्रसाद पर भी संकट गहरा रहा है. हालांकि, वैकल्पिक मार्ग खोजे जा रहे हैं.
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से अयोध्या की प्रसिद्ध 'राम रसोई' और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. राम मंदिर के पास स्थित अमावा मंदिर प्रशासन ने गैस की कमी को देखते हुए फिलहाल निःशुल्क भंडारे का समय सीमित कर दिया है. मैनेजर पंकज कुमार ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अब राइस कुकर, इलेक्ट्रिक कुकर, कोयला और लकड़ी जैसे विकल्पों का उपयोग किया जाएगा. हनुमानगढ़ी क्षेत्र की 150 दुकानों पर लड्डू प्रसाद का उत्पादन भी बाधित हो रहा है, लेकिन मंदिर प्रशासन इस सेवा परंपरा को किसी भी हाल में बंद नहीं होने देने के लिए प्रतिबद्ध है.
राम रसोई का बदला समय और नई तैयारी
अमावा मंदिर की राम रसोई में रोजाना 10 से 20 हजार श्रद्धालु भोजन करते हैं. गैस की अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल भंडारे का समय सुबह 11:30 से दोपहर 1 बजे तक सीमित कर दिया गया है. मैनेजर पंकज कुमार का कहना है कि एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों और पारंपरिक ईंधनों की व्यवस्था की जा रही है. केंद्र सरकार भी अन्य देशों से गैस आपूर्ति के प्रयास कर रही है, लेकिन मंदिर अपनी ओर से पूरी तरह तैयार है.
हनुमानगढ़ी के प्रसाद और होटलों पर असर
गैस संकट की आंच सिर्फ रसोइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि हनुमानगढ़ी के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद पर भी इसका असर दिख रहा है. यहां के दुकानदार रोजाना करीब 30 से 40 किलो लड्डू तैयार करते हैं, लेकिन आपूर्ति कम होने से उत्पादन रुकने की कगार पर है. शहर के होटल और रेस्टोरेंट संचालक भी सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं. व्यापारियों को डर है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो अयोध्या आने वाले हजारों पर्यटकों के लिए खान-पान की व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा.
सेवा परंपरा को बचाने का संकल्प
चुनौतियों के बावजूद अयोध्या के संतों और मंदिर प्रशासन का मानना है कि सेवा की परंपरा किसी भी वैश्विक संकट से बड़ी है. अमावा मंदिर ने संदेश दिया है कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, रामनगरी आने वाले भक्तों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा. गैस के अभाव में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग कर भंडारा निरंतर जारी रखा जाएगा. अयोध्या का संकल्प है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव श्रद्धा और सेवा के इस मार्ग में बाधा नहीं बन पाएगा.