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मोईद खान कैसे बच निकला? अयोध्या गैंगरेप केस में बरी, राजू खान को 20 साल की सजा; जानें कोर्ट के वे 5 बड़े आधार

अयोध्या के चर्चित गैंगरेप मामले में मोईद खान की रिहाई ने पुलिस की जांच और कानून के पेच पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां दूसरे आरोपी राजू खान को 20 साल की सजा सुनाई गई, वहीं मास्टरमाइंड कहे जा रहे मोईद खान को सबूतों के अभाव और बयानों में विरोधाभास के कारण अदालत ने बरी कर दिया.

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अयोध्या केस में सपा नेता मोईद खान को मिली राहत.(Photo:ITG)
अयोध्या केस में सपा नेता मोईद खान को मिली राहत.(Photo:ITG)

अयोध्या में नाबालिग लड़की से गैंगरेप के आरोपी सपा नेता मोईद खान को अदालत ने बरी कर दिया है. वहीं, इस मामले में दूसरे आरोपी राजू खान को अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है. जिस मोईद खान को घटना के वक्त मास्टरमाइंड, मुख्य आरोपी बताया गया, आखिरी में उसको अदालत ने बरी कर दिया. आइए जानते हैं ट्रायल के बाद किन सबूतों और दलीलों के आधार पर मोईद को बरी किया गया, साथ ही पुलिस की जांच में कहां अदालत ने सवाल खड़े किए... 

बता दें कि 29 जुलाई 2024 को अयोध्या के पूराकलंदर एरिया में नाबालिग बच्ची से गैंगरेप के मामले में पोक्सो व गैंगरेप की धाराओं में एक एफआईआर दर्ज हुई. दर्ज कराई गई एफआईआर में सपा नेता मोईद खान और उसकी बेकरी में काम करने वाले राजू खान को नामजद किया गया. पुलिस ने इस मामले में राजू और मोईद को गैंगरेप का आरोपी मानकर चार्जशीट लगाई.

पीड़िता ने इस मामले में मजिस्ट्रेट के सामने दो बार बयान दिया. एक बार बयान में उसने राजू खान के साथ जो नाम लिया वह मोहित था. मोहित कौन था.? इस पर पुलिस ने कभी जांच नहीं की. हालांकि, एक मोहित पीड़िता की बड़ी बहन का देवर भी है. वहीं, एक अन्य मोहित भी निकला, जो पीड़िता के पास वाले गांव का रहने वाला था. लेकिन पीड़िता ने जब मजिस्ट्रेट के सामने दूसरा बयान दिया तो कहा- पहले बयान में उसके तबीयत खराब थी, वह मोहित नहीं, मोईद खान है.

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पुलिस के सामने दिए बयान में पीड़िता ने कहा कि राजू खान और मोईद खान वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसका 2 महीने तक शोषण करते रहे. लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता ने कहा कि उसके साथ सिर्फ एक ही बार राजू और मोईद खान ने बारी-बारी से रेप किया.

एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच के क्रम में पुलिस ने जब पीड़िता के बयान के आधार पर घटनास्थल पूछा, तो उसने घटनास्थल एक खेत के पास चिलबिल का पेड़ के नीचे की जगह को बताया.

इसी जगह की पुलिस की फोरेंसिक टीम ने अपनी पड़ताल की और इसी जगह का पुलिस ने अपनी चार्जशीट में घटनास्थल के तौर पर नक्शा बनाकर भी दाखिल किया गया. लेकिन कोर्ट के बयान में पीड़िता ने घटनास्थल मोईद खान की बेकरी के पीछे बने कमरे को बताया. जहां कोई सबूत या जिक्र पुलिस की केस डायरी में नहीं था.

पीड़िता ने बयान दिया कि गैंगरेप के दौरान राजू खान ने मोबाइल पर उसका वीडियो बनाया, लेकिन पुलिस ने जब मुईद खान और राजू के मोबाइल बरामद किए, उनको फॉरेंसिक लैब भेजा तो पता चला न तो मोबाइल में कोई ऐसा वीडियो रिकॉर्ड किया गया है और न ही ऐसे किसी वीडियो को डिलीट किया गया है. यानी पुलिस के फोरेंसिक जांच में दोनों आरोपियों के मोबाइल में ऐसे किसी वीडियो के लिए जाने या डिलीट करने के सबूत नहीं मिले थे.

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आरोपियों की शिनाख्त वाले पीड़िता के बयान में विरोधाभास को आधार बनाया गया. पीड़िता ने पहले मोईद खान की जगह मोहित नाम लिया. बाद में उसने अपने दूसरे बयान में मोईद खान का नाम लिया.

वहींं, मोईद की हुलिया के संबंध में उसने कहा की मोईद खान मोटा आदमी है, जबकि पुलिस की तरफ से दाखिल किए गए मोईद खान के शारीरिक बनावट और मेडिकल रिपोर्ट में मोईद का हुलिया मीडियम साइज था. 

इस मामले में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के गर्भ में पल रहे भ्रूण को गर्भपात कराया, लेकिन जब इस मामले में दोनों आरोपी राजू खान और मोईद खान का डीएनए मैच करवाया गया तो वो सिर्फ राजू खान का निकला. मोईद खान का डीएनए मैच नहीं हुआ.

इस पूरे केस में पुलिस की जांच पर भी सवाल खड़े हुए हैं. अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि इस मामले की सतही विवेचन हुई है.

पीड़िता के बयान कि आरोपी राजू खान ने उसकी मां के फोन पर कॉल कर बुलाया था. पुलिस ने इस मामले में आरोपी और पीड़िता की मां की न तो कॉल डिटेल निकाली और न ही दोनों ही मोबाइल की लोकेशन निकाली कि जिस वक्त की घटना बताई गई उस वक्त आरोपी और पीड़िता की मां के मोबाइल कहां थे.

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पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने जिस खेत को घटनास्थल माना नक्शा बनाया, उस घटनास्थल के अक्षांश देशांतर तो लिए लेकिन उसका मिलान किसी भी आरोपी के मोबाइल से नहीं कराया ताकि पता चल सके कि घटना स्थल पर कोई आरोपी घटना के वक्त था या नहीं.

पीड़ित ने जब अपने पहले बयान में राजू खान के साथ मोहित नाम लिया, तो पुलिस ने उस मोहित को तलाशने की जरूरत ही नहीं समझी. पुलिस अपने आप मान चुकी थी कि पीड़िता मोहित नहीं, मोईद बता रही है और जिसे पीड़िता ने बाद में अपने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में बताया भी कि मोहित नहीं, मोईद था.

फिलहाल ऐसे ही तमाम तथ्यों के आधार पर पीड़िता के बयानों में विरोधाभास, डीएनए मैच नहीं होने के चलते ही अयोध्या कोर्ट ने मोईद खान को बरी कर दिया है, जबकि राजू खान को नाबालिक लड़की से दुष्कर्म का आरोपी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई है.

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