ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने वाराणसी के विद्यामठ में आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अपनी सफाई पेश की है. आशुतोष ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि शंकराचार्य के शिविर में वेदपाठी बटुकों का शोषण होता है. शंकराचार्य ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने न्यायालय में अपनी बेगुनाही के प्रमाण दे दिए हैं. उनके अनुसार, यह विवाद उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने और गौ रक्षा के आंदोलन को रोकने के लिए पैदा किया गया है. पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी अब कार्रवाई की तैयारी है.
'गौ रक्षा आंदोलन से डरी हुई है सरकार'
शंकराचार्य ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि गौ माता की रक्षा के लिए किए जा रहे उनके प्रयास सरकार को पसंद नहीं आ रहे हैं. इसी वजह से एक 'कार्टल' बनाकर उन पर प्रहार किए जा रहे हैं और उनके लोगों को धमकाया जा रहा है.
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि गौ माता को 'राज माता' घोषित किया जाए और गौ मांस का व्यापार पूरी तरह बंद हो. महाराज ने आरोप लगाया कि जब अन्य हथकंडे काम नहीं आए, तो उनकी सामाजिक हत्या करने के लिए यौन शोषण जैसे कुत्सित आरोप लगाए गए.
संपत्ति और मारपीट के दावे भी फर्जी
अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन पर आय से अधिक संपत्ति और गला दबाने जैसे अन्य मुकदमे भी किए गए हैं, जो पूरी तरह निराधार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि एक शंकराचार्य की कोई निजी आय या संपत्ति नहीं होती. जिस रात उन पर गला दबाने का आरोप लगा, उस समय वे मीडिया के कैमरों के सामने थे. उन्होंने यूपी सरकार पर भी इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया. जबलपुर केस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वहां सफलता नहीं मिली, तो अब ये नए पैंतरे अपनाए जा रहे हैं.
काशी विश्वनाथ मंदिर की मर्यादा पर सवाल
शंकराचार्य ने काशी विश्वनाथ मंदिर की मर्यादा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सवाल किया कि मंदिर के बाहर लगा वह पुराना बोर्ड कहां गया, जिस पर गैर-आर्यों का प्रवेश वर्जित होने की बात लिखी थी. उन्होंने मांग की कि उस बोर्ड को पुनः स्थापित किया जाए ताकि मंदिर की पवित्रता सुरक्षित रहे. महाराज ने कहा कि वे किसी भी दबाव से भयभीत नहीं हैं और अपनी बात मजबूती से उठाते रहेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा.