कानपुर के HDFC बैंक की एक महिला कर्मचारी का 45 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया खूब वायरल हुआ . वीडियो में महिला बैंक कर्मचारी गुस्से में कहती है 'मैं ठाकुर हूं, बदमाशी मत करना...'. वीडियो सामने आते ही नई बहस छिड़ गई. किसी ने इसे जातिगत अहंकार बताया तो किसी ने सत्ता और सिस्टम से जोड़ दिया. सवाल उठने लगे कि आखिर एक बैंक के भीतर ऐसी बात कहने की नौबत क्यों आई? और क्या वाकई यह मामला जातिवाद का है, या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है?
इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए आज तक उस महिला कर्मचारी आस्था सिंह तक पहुंची जिनका जो वीडियो गुस्सा होती दिख रही हैं.वह कानपुर के पनकी इलाके में स्थित एचडीएफसी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. उनका कहना है कि जिस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर उन्हें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, वह न तो पूरा है और न ही सच के पूरे पहलू को दिखाता है. आस्था के मुताबिक, वीडियो को जानबूझकर एक खास एंगल से काटकर वायरल किया गया, ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके.
6 जनवरी का है वीडियो, पर अब क्यों वायरल हुआ
आस्था सिंह बताती हैं कि यह वीडियो 6 जनवरी का है. उस दिन बैंक में रितु त्रिपाठी नाम की महिला कर्मचारी अपना रिजाइन देने आई थीं. आस्था के अनुसार, रितु त्रिपाठी के साथ उनके पति ऋषि त्रिपाठी भी बैंक पहुंचे. शुरुआत में बात सामान्य थी, लेकिन कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया. आस्था का आरोप है कि बैंक में आते ही रितु त्रिपाठी ने ऊंची आवाज में सवाल करना शुरू कर दिया कि तुमसे बदतमीजी से बात किसने की? इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी की ओर इशारा करते हुए आस्था सिंह का नाम पूछा और फिर कथित तौर पर उनकी जाति को लेकर सवाल करने लगे. आस्था सिंह का कहना है कि ऋषि त्रिपाठी ने उनसे कहा तुम्हारा नाम क्या है? तुम किस जाति से हो? तुम्हारी सारी गर्मी अभी निकाल देता हूं.
आस्था के मुताबिक, लगातार अभद्र भाषा और धमकी भरे लहजे से वह मानसिक दबाव में आ गईं. इसी दौरान, बचाव में उन्होंने यह कहा कि 'मैं ठाकुर हूं'. आस्था सिंह ने बातचीत में यह भी दावा किया कि विवाद की जड़ सिर्फ रिजाइन नहीं थी. उनके मुताबिक, उसी दिन सुबह रितु त्रिपाठी की बहन बैंक आई थीं. बाथरूम से निकलते समय कपड़ा फंसने को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई थी. उसी घटना का बदला लेने के लिए दोपहर में रितु त्रिपाठी अपने पति के साथ बैंक पहुंचीं. आस्था का कहना है कि उस समय उन्हें खुलेआम धमकाया गया कि मैं प्रेस में हूं, तुम्हें नौकरी से निकलवा दूंगा.
महिला कर्मचारी के सामने धमकी
आस्था सवाल उठाती हैं कि अगर एक महिला कर्मचारी को कार्यस्थल पर इस तरह धमकाया जाए, तो उससे यह उम्मीद क्यों की जाती है कि वह चुप रहे? उनका कहना है कि पूरे मामले को जबरन जातिवादी रंग दिया जा रहा है, जबकि असल मुद्दा वर्कप्लेस सेफ्टी और महिला सम्मान का है.
45 सेकंड का वीडियो, पूरी कहानी गायब
आस्था सिंह का बड़ा दावा है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ है, वह सिर्फ 45 सेकंड का है. जबकि बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड है. उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो, तो सीसीटीवी फुटेज सामने आनी चाहिए, जिससे यह साफ हो सके कि वीडियो से पहले क्या हुआ था.
अब लीगल एक्शन की तैयारी
आस्था सिंह ने साफ किया है कि वह इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगी. उनका कहना है कि उनका विवाद रितु त्रिपाठी के पति से कोई व्यक्तिगत नहीं था. रितु त्रिपाठी बैंक में रिजाइन देने आई थीं और उसमें कुछ औपचारिक देरी हुई थी, बस इसी बात पर उनके पति नाराज हो गए.
आस्था कहती हैं कि उन्होंने उसी दिन बैंक के आधिकारिक ईमेल पर पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज करा दी थी. यह वीडियो अब इस लिए वायरल किया गया होगा क्योंकि पहले रितु त्रिपाठी का फाइनल बिल और सेटलमेंट बाकी था. उनका आरोप है कि जैसे ही सेटलमेंट पूरा हुआ, जानबूझकर पुराना वीडियो वायरल कर दिया गया.
योगी सरकार को टारगेट करने का आरोप
आस्था सिंह का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले को कुछ लोग राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. जातिवाद का मुद्दा बनाकर योगी सरकार को घसीटा जा रहा है, जबकि सच्चाई इससे अलग है. उनके मुताबिक, यह मामला एक महिला कर्मचारी की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है, न कि किसी जाति या राजनीति से.