यूपी के पीलीभीत में तीन पत्नियों वाले चपरासी ने सरकारी सिस्टम में ऐसी सेंधमारी की, जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई. कागजों पर पत्नियां टीचर बनीं, साली और रिश्तेदारों को भी क्लर्क और ठेकेदार बना दिया. वेतन भी मिला, बिल भी पास हुए और करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से सीधे निजी खातों में पहुंचते रहे. यह गुपचुप खेल आठ साल तक चलता रहा. लेकिन जब बैंक खाते में करोड़ों की हलचल दिखी तो पूरा राज खुल गया.
एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में अब सात महिलाओं की गिरफ्तारी हुई है. इनमें मुख्य आरोपी इल्हाम-उर-रहमान शम्सी की दो पत्नियां लुबना और अजरा खान भी शामिल हैं. इससे पहले उसकी एक अन्य पत्नी अर्शी खातून की गिरफ्तारी हो चुकी थी, जिसे मार्च में जमानत मिल गई थी.

फरवरी 2026 में बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर की नजर एक संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर पड़ी. जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय के सरकारी खाते से 1.15 करोड़ रुपये एक निजी खाते में ट्रांसफर किए गए थे. मामला तुरंत जिला प्रशासन तक पहुंचा.
डीएम ने जांच के आदेश दिए. तीन सदस्यीय कमेटी बनी और जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, अधिकारियों के होश उड़ते गए. पता चला कि यह खेल कोई एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे आठ साल से चल रहा था.
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इल्हाम-उर-रहमान शम्सी एक इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात था. करीब आठ साल पहले उसने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अपनी तैनाती करा ली. यहीं से उसे वेतन टोकन तैयार करने का काम मिला. यह जिम्मेदारी जब मिली तो उसने सिस्टम की कमजोरियों को समझा और सरकारी खजाने तक पहुंच बना ली.
शम्सी ने अपनी पत्नियों को फर्जी शिक्षक बना दिया. इतना ही नहीं, साली, सास और अन्य महिला रिश्तेदारों को भी फर्जी तरीके से क्लर्क, शिक्षक और ठेकेदार बना दिया गया. इन फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन, बिल और अन्य भुगतान जारी किए जाते रहे. पैसा सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचता रहा.

8.15 करोड़ रुपये का खेल
जांच में सामने आया कि सात बैंक खातों में कुल 8.15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. पुलिस ने अब तक 53 संदिग्ध खातों की पहचान की है. इनमें से 5.5 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं. अधिकारियों का मानना है कि आगे जांच में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.
पुलिस ने अब सात महिलाओं को गिरफ्तार किया है, इनमें शम्सी की दो पत्नियां लुबना और अजरा खान, उसकी साली, सास और अन्य करीबी महिलाएं शामिल हैं.
अर्शी खातून को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, हालांकि वह फिलहाल जमानत पर बाहर है. शम्सी की तीसरी पत्नी भी जांच के दायरे में है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 को कोतवाली में केस दर्ज हुआ था. जांच के दौरान गड़बड़ी की बातें सामने आईं.
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मुख्य आरोपी शम्सी ने 30 मार्च को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी. हालांकि, पुलिस उसकी भूमिका और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है. सवाल है कि आखिर आठ साल तक करोड़ों रुपये फर्जी खातों में जाते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी?
एक चपरासी ने विभागीय खामियों का फायदा उठाकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा दिया? अब पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था. क्या सिर्फ शम्सी अकेला था, या फिर इसके पीछे कोई और भी था?