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उम्र 21 साल, SUV पर स्टार फ्लैग और साथ में कमांडो... NEET फेल 'फर्जी ब्रिगेडियर' को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सेना ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए 21 वर्षीय आर्यन वर्मा को हिरासत में लिया है. आरोपी खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताकर घूम रहा था. वह सैन्य वर्दी पहनकर कैंट क्षेत्र में आता-जाता था और अपने साथ बाउंसरों को NSG कमांडो बताता था. उसके पास से नकली पहचान पत्र, रेजिमेंटल स्टिक और नकली पिस्तौल बरामद हुई.

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पहले दिल्ली में नीट की तैयारी कर रहा था आर्यन. (Photo: Vinay Pandey/ITG)
पहले दिल्ली में नीट की तैयारी कर रहा था आर्यन. (Photo: Vinay Pandey/ITG)

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर छावनी में शुक्रवार को शहीद म्यूज़ियम में एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद सेना के जवानों ने 21 साल के एक युवक को हिरासत में लिया था. युवक खुद को भारतीय सेना में ब्रिगेडियर बताकर घूम रहा था. आरोपी की पहचान आर्यन वर्मा के तौर पर हुई है. सबसे बड़ी बात वह शाहजहांपुर के मिलिट्री एरिया में आर्मी यूनिफॉर्म में घूमता था. उसने एक पूरी टीम तैयार कर रखी थी, जो उसके साथ-साथ घूमती थी. 

अधिकारियों के मुताबिक सेना के अधिकारी अप्रैल से ही वर्मा पर नज़र रखे हुए थे. उन्हें जानकारी मिली थी कि वह अक्सर ब्रिगेडियर की सेरेमोनियल ड्रेस पहने और खुद को एक बड़े अधिकारी के तौर पर पेश करते हुए देखा जाता था. हालांकि हर बार वह बचकर निकल जाता था. ऐसे में अधिकारियों ने उसे एक ट्रैप बनाकर फंसाने की योजना बनाई. 

फर्जी ब्रिग्रेडियर से पूछताछ करते सेना के अधिकारी. (Vinay Pandey/ITG)

सेना के बनाए ट्रैप में फंसा आरोपी
ऐसे में संदिग्ध को पकड़ने के लिए सेना के अधिकारियों ने आम नागरिक बनकर उससे संपर्क किया और उसे भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा उम्मीदवारों को मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए बुलाया. यह कार्यक्रम कैंटोनमेंट इलाके में मौजूद शहीद म्यूज़ियम में रखा गया था.

वर्मा शुक्रवार सुबह ब्रिगेडियर की वर्दी पहनकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा. अधिकारियों ने बताया कि वह एक SUV (हैरियर) में आया था. जिस पर सीनियर अधिकारियों वाले मिलिट्री स्टार और झंडे लगे हुए थे. प्लान के मुताबिक सेना के जवानों ने उसके आते ही उसे हिरासत में ले लिया. ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने उसके ड्राइवर से एक नकली सरकारी पहचान पत्र भी बरामद किया.

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बाउंसर को बताता था एनएसजी कमांडो
जांच टीम को पता चला कि वर्मा के साथ दो बाउंसर थे. जिन्हें उसने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो बताया था. उसने दावा किया था कि उसे खास सुरक्षा मिली हुई है और उसने खुद को एक हाई-प्रोफाइल मिलिट्री ऑफिसर के तौर पर पेश किया.

उसके पास से अधिकारियों को एक पहचान पत्र भी मिला है. जिस पर आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज के डीन की मुहर लगी थी. उसके पास से सेना की रेजिमेंटल स्टिक और एक नकली पिस्तौल भी ज़ब्त की गई है. फिलहाल बरेली की आर्मी इंटेलिजेंस टीम ने जांच अपने हाथ में ले ली है और आरोपी से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने ऐसा दिखावा क्यों किया?

सेना के अधिकारी कर रहे हैं पूछताछ
अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अब तक उसने किस-किस तरह की धोखाधड़ी. साथ ही उसके पास नकली दस्तावेज़ और वर्दी कहां से आए और क्या इसमें कोई और भी शामिल था. पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने बताया कि सेना के अधिकारी अभी वर्मा से पूछताछ कर रहे हैं.

दीक्षित ने कहा कि जब सेना अपनी जांच पूरी कर लेगी और उसे पुलिस की कस्टडी में सौंप देगी, तब FIR दर्ज की जाएगी और मामले की पूरी जांच की जाएगी. 

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नीट में कई बार फेल हो चुका है आरोपी
वर्मा के पास से मिले दस्तावेज़ों के अनुसार उसकी उम्र 21 साल है. वह दिल्ली में रहकर नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की तैयारी कर रहा था, जिसमें वह कई बार फेल हो चुका था. अधिकारियों ने बताया कि वर्मा के पिता बागवानी विभाग में अधिकारी हैं, जबकि उसकी मां स्कूल टीचर हैं.

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