उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित डीएस डिग्री कॉलेज प्रशासन ने करीब 6 महीने पहले बंदरों के हमले से छात्रों को बचाने के लिए 12 साल के लंगूर 'गोलू' को काम पर रखा है. यह लंगूर सुबह 8 से शाम 5 बजे तक कैंपस में गश्त कर 600-700 बंदरों के झुंड को दूर भगाता है. इस सुरक्षा सेवा के बदले गोलू के मालिक लव को हर महीने 12,000 रुपये सैलरी दी जाती है. प्राचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज के इस फैसले से पढ़ाई का माहौल सुधरा है और छात्र अब बिना डरे कैंपस में घूम पा रहे हैं. संभल निवासी लव पिछले कई वर्षों से गोलू को पाल रहे हैं और उसे घर का खाना व फल खिलाते हैं.
600 बंदरों का खौफ और गोलू की ड्यूटी
प्रिंसिपल डॉ. मुकेश भारद्वाज के मुताबिक, कॉलेज में बंदरों का इतना आतंक था कि वे छात्रों के कपड़े और किताबें तक फाड़ देते थे. कई बार स्टाफ और विद्यार्थियों पर हमले भी हुए. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए गोलू को लाया गया. गोलू की ड्यूटी शुरू होते ही बंदरों ने कैंपस में कदम रखना बंद कर दिया है. गोलू सिर्फ कॉलेज ही नहीं, बल्कि अलीगढ़ स्मार्ट सिटी के अन्य इलाकों में भी बंदर भगाने का काम करता है।
छात्रों का दोस्त बना 12 हजार का 'गार्ड'
गोलू अब सिर्फ एक रक्षक नहीं, बल्कि कॉलेज की पहचान बन गया है. छात्रा यदा गौतम और माधुरी बताती हैं कि पहले खाना लेकर आना मुश्किल था, लेकिन अब वे चैन की सांस ले रही हैं. छात्र अतुल शर्मा के अनुसार, गोलू की वजह से कैंपस का तनाव सुरक्षा और मुस्कान में बदल गया है. छात्र अक्सर गोलू के साथ सेल्फी लेते नजर आते हैं। वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता और बेहद शांत स्वभाव का है.
लंगूर की डाइट और मालिक का अनुभव
गोलू के मालिक लव के अनुसार, वह उसे बचपन से पाल रहे हैं. गोलू के खान-पान का खास ख्याल रखा जाता है, जिसमें बैंगन, पपीता, आलू, टमाटर और रोटी शामिल है. लव उसे अपने साथ संभल से अलीगढ़ लेकर आए हैं. कॉलेज के अलावा वह अलग-अलग सरकारी प्रोजेक्ट्स में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. प्रशासन और छात्र दोनों ही गोलू के काम से बेहद संतुष्ट हैं क्योंकि उसने कॉलेज को फिर से सुरक्षित बना दिया है.