नए यूजीसी नियमों का विरोध कर रहे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री धरने पर बैठ गए हैं. अग्निहोत्री का ये धरना कलेक्ट्रेट ऑफिस के गेट पर हो रहा है. उनका कहना है कि डीएम उस शख्स का नाम बताएं जिसने देर शाम मीटिंग के दौरान फोन किया था और उनके लिए अपमाजनक शब्दों का प्रयोग किया.
इससे पहले अलंकार अग्निहोत्री के सरकारी आवास पर भारी पुलिस को तैनात किया गया था. कंपाउंड के सभी गेटों को बंद कर दिया गया था. पुलिस बाहरी किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं दे रही थी. इसपर निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है. लेकिन बाद में वो जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंच गए.
हालांकि, बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर उन्हें पुलिस फोर्स द्वारा रोक लिया गया. अग्निहोत्री भीड़ के साथ अंदर जाना चाह रहे थे. उनका कहना है वह तब तक धरने पर बैठे रहेंगे जब तक जिलाधिकारी महोदय सबके सामने आकर यह नहीं बता देते कि कल जो फोन आया था वो किसने किया था. फोन करने वाले ने कहा था- 'इस पंडित का दिमाग खराब हो गया है.' आखिर डीएम किससे आदेश ले रहे थे.
अलंकार अग्निहोत्री का बयान
बकौल पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट- "मैं तब तक यहां से नहीं हिलूंगा, जब तक डीएम साहब यह नहीं बताते कि कल शाम मीटिंग के दौरान वह फोन किसका था? फोन पर कहा गया कि इस पंडित का दिमाग खराब हो गया है, इसे यहीं बिठा लो. आखिर डीएम साहब किससे आदेश ले रहे थे?"
गौरतलब है कि आज हंगामे की शुरुआत सुबह ही हो गई थी जब अलंकार अग्निहोत्री के सरकारी आवास को 'छावनी' में तब्दील कर दिया गया. भारी पुलिस बल तैनात था, गेट बंद थे. अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें 'हाउस अरेस्ट' किया गया है ताकि वे बाहर न निकल सकें. लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ, वे जुलूस की शक्ल में समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए.
बकौल अग्निहोत्री- मामला सिर्फ एक फोन कॉल का नहीं है. हमारा विरोध नए यूजीसी नियमों को लेकर है, जो सवर्णों के खिलाफ 'काला कानून' है. इसके साथ ही माघ मेले में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी ने भी उनके गुस्से को बढ़ा दिया. फिलहाल, शासन ने उन्हें निलंबित कर शामली से अटैच कर दिया है, लेकिन अग्निहोत्री का कहना है- "जब इस्तीफा दे दिया, तो निलंबन कैसा?"