समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर भाजपा पर मतदाता सूची से नाम कटवाने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने बाबागंज और औरैया समेत कई जिलों का हवाला देते हुए कहा कि अज्ञात व्यक्तियों के जरिए फर्जी हस्ताक्षर करवाकर फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं.
सपा का दावा है कि उनके नगर अध्यक्ष, बलिया विधायक की पत्नी और अयोध्या के कार्यकर्ताओं तक के नाम काट दिए गए हैं. अखिलेश के अनुसार, भाजपा की गुप्त बैठकों में यह रणनीति तय हुई थी ताकि जहां सपा मजबूत है, वहां वोट कम किए जा सकें.
वहीं, महोबा में पानी की टंकी दरकने के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लिखा- 'महोबा में भाजपा के भ्रष्टाचार के बोझ को न उठा पायी पानी की टंकी. यहां बुलडोजर नहीं चलेगा क्योंकि भ्रष्टाचार की पाइप लाइन महोबा से लखनऊ तक, जलापूर्ति की जगह धनापूर्ति कर रही है. ये ‘जल मिशन’ नहीं, ‘कमीशन-मिशन’ है. भाजपा जाए तो पानी मिल पाए!'
फॉर्म-7 और फर्जी साइन का खेल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बाबागंज विधानसभा में रामदेव नामक व्यक्ति के फर्जी साइन से नाम कटवाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक हजार से ज्यादा फॉर्म-7 भरे हैं, जबकि सपा के लोगों के नाम काटने का आधार '6 बच्चे होना' जैसी अजीब दलीलें दी जा रही हैं.
सपा मुखिया के मुताबिक, खुद बचने के लिए भाजपा अज्ञात लोगों के नाम से फॉर्म भरवा रही है. औरैया जिलाधिकारी द्वारा फॉर्म-7 न बांटने की बात कहने पर भी उन्होंने सवाल उठाए.
विरासत में गद्दी मिलती है, बुद्धि नहीं
सपा अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि गद्दी विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं. उन्होंने बृजेश पाठक पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग 'बाबा' का नाम लेना चाहते हैं लेकिन 'बाबर' का ले लेते हैं.
अखिलेश ने चुनाव आयोग से मांग की है कि नाम हटाने की प्रक्रिया केवल बीएलओ (BLO) के माध्यम से हो और इसका डेटा हर दिन सार्वजनिक किया जाए. उन्होंने अपने बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को इस 'साजिश' से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग देने की बात भी कही.
चुनाव जीतने का शॉर्टकट है वोट काटना
यादव ने कहा कि भाजपा को पता है कि वह यूपी का चुनाव नहीं जीत रही है, इसलिए वह विपक्ष को इन कागजी फॉर्मों में उलझा रही है. उन्होंने कन्नौज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के नेताओं ने तीन लाख वोट कटवाने का दावा किया था. सपा ने इस संबंध में ज्ञापन दिया है और पवन पांडे के पास मौजूद लंबी सूची का हवाला देते हुए मैपिंग के बाद भी नाम काटे जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है.