
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास कार्य के दौरान सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कर धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में विपक्षी नेताओं पर शिकंजा कस गया है. पुलिस ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और बिहार के नेता पप्पू यादव सहित अन्य के खिलाफ चौक थाने में 8 अलग-अलग FIR दर्ज की हैं.
इन नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 179 के तहत नोटिस जारी कर 72 घंटे के अंदर थाने आकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन का दावा है कि AI जनरेटेड और फर्जी तस्वीरों के जरिए सरकार की छवि बिगाड़ने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई है.
फर्जी वीडियो और सियासत का शोर
रविवार को मणिकर्णिका घाट पर एक चबूतरे को मशीन से तोड़ने का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला बोला. संजय सिंह ने इसे 'पौराणिक मंदिरों का विध्वंस' बताया, तो पप्पू यादव ने इसकी तुलना गजनवी के कृत्यों से कर दी.
हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि AI तकनीक से बने फर्जी वीडियो के जरिए भ्रम फैलाया जा रहा है. पुलिस कमिश्नर के अनुसार, जो मंदिर क्षतिग्रस्त दिखाए गए, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं.
गंभीर धाराओं में घिरे दिग्गज नेता
वाराणसी पुलिस ने आरोपियों पर धारा 196, 298, 299 और 353(1)(C) जैसी गंभीर धाराएं लगाई हैं. ये धाराएं धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने और झूठी अफवाहें उड़ाने से संबंधित हैं, जिनमें 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है. डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने बताया कि नोटिस जारी कर दिया गया है और अब पुलिस गिरफ्तारी से पहले सभी तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि कोर्ट से वारंट लिया जा सके.

सोशल मीडिया पोस्ट बनी गले की फांस
संजय सिंह ने X पर वीडियो शेयर कर पीएम मोदी पर निशाना साधा था, वहीं पप्पू यादव ने FIR के बाद भी तल्ख तेवर दिखाते हुए फिर से विवादित तस्वीरें पोस्ट कीं. पुलिस का कहना है कि शेयर की गई कुंभा महादेव मंदिर की तस्वीर असल में सुरक्षित स्थान की है, जिसे छेड़छाड़ कर क्षतिग्रस्त दिखाया गया.अब इन नेताओं को अपनी पोस्ट के संदर्भ में पुलिस के सवालों का सामना करना होगा.
पुलिस की अगली तैयारी
वाराणसी पुलिस अब इस मामले को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) की रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाएगी. पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने साफ किया कि इंटरनेट पर फर्जी तस्वीरें डालकर लोगों को गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. अगर 72 घंटों में संतोषजनक जवाब या बयान दर्ज नहीं कराया गया, तो पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कदम उठाएगी.