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पीएम मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाला कौन है? जानिए रोज कितनी होती है कमाई

झारग्राम में चुनावी दौरे के बीच अचानक रुके काफिले से उतरे नरेंद्र मोदी ने सड़क किनारे एक दुकानदार से झालमुड़ी खाई, थोड़ी बातचीत की और पैसे देकर आगे बढ़ गए.यह छोटा सा पल अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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वायरल वीडियो के बाद लोग इस दुकानदार के बारे में जानने को उत्सुक हो गए (Photo:ANI)
वायरल वीडियो के बाद लोग इस दुकानदार के बारे में जानने को उत्सुक हो गए (Photo:ANI)

पश्चिम बंगाल के चुनावी प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी का एक छोटा-सा पड़ाव अब बड़ी चर्चा बन चुका है. झारग्राम में व्यस्त रैलियों के बीच उनका काफिला अचानक रुका और वे सीधे सड़क किनारे की एक साधारण-सी झालमुड़ी की दुकान पर पहुंच गए. वहां मौजूद दुकानदार के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था.

सड़क किनारे रुका काफिला, चौंक गया दुकानदार

मोदी ने मुस्कुराते हुए दुकानदार से कहा कि भाई, मुझे तुम्हारा स्पेशल झालमुड़ी बना कर दो. अचानक सामने देश के प्रधानमंत्री को देखकर दुकानदार कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गया, लेकिन फिर तुरंत काम में जुट गया. मिर्च-मसाले, मूंगफली और तीखे अचार का संतुलन बनाते हुए उसने ताजा झालमुड़ी तैयार की.

यह भी पढ़ें: 'भाई, हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ…' पीएम मोदी ने चखी बंगाल की फेमस झालमुड़ी, जानें क्यों है ये खास

'प्याज डालूं?' और आया मजेदार जवाब

झालमुड़ी बनाते समय दुकानदार ने पूछा सर, प्याज डालूं? इस पर प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया कि प्याज तो खाता हूं, किसी का दिमाग नहीं खाता.बस यही एक लाइन पूरे वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने के लिए काफी साबित हुई.झालमुड़ी लेने के बाद मोदी ने उसके पैसे भी दिए। दुकानदार ने पहले इनकार किया, लेकिन प्रधानमंत्री के बहुत जोर देने पर उसने पैसे स्वीकार कर लिए.

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कौन है यह झालमुड़ी वाला?

इस वायरल वीडियो के बाद लोग इस दुकानदार के बारे में जानने को उत्सुक हो गए. उसका नाम विक्रम साह (या विक्रम कुमार) है, जो मूल रूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला है. पिछले कई सालों से वह झारग्राम में छोटी-सी दुकान चलाकर अपने परिवार का गुजारा कर रहा है.न्यूज एजेंसी से बातचीत में विक्रम ने बताया कि वह सिर्फ नौवीं तक पढ़ा है. आर्थिक तंगी के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर सका. उसने कहा कि रोज करीब 1000 से 1200 रुपये की कमाई हो जाती है, उसी से घर चलता है. उसके परिवार में माता सुनीता देवी और पिता उत्तम साह हैं.

बातचीत में नहीं हुई राजनीति

विक्रम के मुताबिक, इस मुलाकात में राजनीति की कोई बात नहीं हुई. प्रधानमंत्री ने सिर्फ परिवार, पढ़ाई और काम के बारे में सामान्य बातचीत की. यही सादगी इस पूरे वाकये को और खास बनाती है.

पीएम से ऑटोग्राफ लेना भूल गया

विक्रम ने मुस्कुराते हुए बताया कि उसे एक बात का अफसोस है.वह प्रधानमंत्री से ऑटोग्राफ लेना भूल गया.उसने कहा कि यह पल जिंदगी भर याद रहेगा. मुझे बहुत अच्छा लगा कि देश के प्रधानमंत्री मेरी छोटी-सी दुकान पर आए.

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वायरल हुआ झालमुड़ी वाला

यह साधारण-सी मुलाकात अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुकी है. एक आम दुकानदार की जिंदगी में आए इस खास पल ने यह दिखा दिया कि बड़े पद पर बैठे लोग भी छोटी-छोटी खुशियों को कितना महत्व देते हैं.

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