
वेनेजुएला में हुए घटनाक्रम से दुनिया हैरान है. ऐसे घटनाक्रम दुनिया में कम ही हैं जहां किसी देश मौजूदा राष्ट्रपति को सोते हुए उनके घर से पत्नी समेत उठा लिया गया हो. भारत में सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम को लेकर जबर्दस्त प्रतिक्रिया आ रही है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि अगर वेनेजुएला के पास परमाणु हथियार होता तो अमेरिका ऐसा करने की जुर्रत नहीं करता.
सोशल मीडिया पर चर्चा के दौरान लोगों ने यह भी कहा है कि भारत के लोगों को हमें अपने पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने देश को परमाणु शक्ति संपन्न बनाया. न्यूक्लियर हथियारों की शक्ति के दम पर भारत की संप्रभुता सुरक्षित है.
एक यूजर ने कहा कि इंदिरा गांधी को स्माइलिंग बुद्धा के लिए धन्यवाद, नहीं तो बुद्ध का देश भी वेनेजुएला की तरह अपमानित हो रहा होता.
बता दें कि स्माइलिंग बुद्धा भारत का पहला सफल परमाणु परीक्षण था. 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण रेगिस्तान में इंदिरा गांधी की सरकार ने भारत का पहला परमाणु परीक्षण किया था. . बुद्ध पूर्णिमा के दिन परीक्षण होने से इसका कूटनाम "स्माइलिंग बुद्धा" पड़ा, जो शांतिपूर्ण उद्देश्यों का प्रतीक था.
Thank You Indira Gandhi for Smiling buddha else budh ka desh would've been getting humiliated like venezuela too. pic.twitter.com/Z8NrYJfQsx
— Mr Melancholy (@chakravartiiin) January 3, 2026
इस परीक्षण ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया. परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगाए. लेकिन भारत अडिग रहा.
जाने माने डिबेटर आनंद रंगनाथन ने यूक्रेन की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा है, " इंदिरा गांधी, एचजे भाभा, राजा रमन्ना, आर चिदंबरम, पीके अयंगर, होमी सेठना, एनएस वेंकटेशन, पीआर रॉय.
अटल बिहारी वाजपेयी, एपीजे अब्दुल कलाम, के संथानम, सतिंदर सिक्का, अनिल काकोडकर, जीआर दीक्षितुलु.
इन नामों को याद रखें. हम उनकी वजह से यूक्रेन या वेनेज़ुएला नहीं हैं."

लौहपुरुष नाम के एक यूजर ने लिखा है, "वेनेजुएला को देखने के बाद इंदिरा गांधी के लिए मेरा सम्मान और बढ़ गया है. जब अमेरिका हम पर हमला करने के लिए हमारे दरवाजे पर था, तब भी वह बिल्कुल नहीं घबराईं."

एक दूसरे यूजर ने वेनेजुएला की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा है, "न्यूक्लियर हथियार की नींव रखने के लिए इंदिरा गांधी का धन्यवाद. प्रतिबंधों के बावजूद इसे दुनिया के लिए खोलने के लिए वाजपेयी का धन्यवाद, और न्यूक्लियर डील के ज़रिए इसे दुनिया भर में मान्यता दिलाने में मदद करने के लिए मनमोहन का धन्यवाद."

बता दें कि पोखरण-2 भारत का दूसरा परमाणु परीक्षण था, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के तहत 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में 5 भूमिगत विस्फोट किए गए. इसे ऑपरेशन शक्ति के नाम से जाना गया, जिसमें फ्यूजन (हाइड्रोजन बम) और फिशन बम शामिल थे.
इसने भारत को पूर्ण परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित किया. अमेरिका-पाकिस्तान ने निंदा की, आर्थिक प्रतिबंध लगाए.
राजीव नाम के यूजर ने लिखा है, " USA ने हमें डराया। USA ने हमें न्यूक्लियर बनाने से रोकने के लिए सब कुछ किया. लेकिन इंदिरा गांधी सभी धमकियों के सामने डटी रहीं और 1974 में ही हमें एक न्यूक्लियर देश बना दिया. आजकल जब मैं USA को दूसरे देशों पर हमला करते देखता हूं, तो मुझे न्यूक्लियर होने का महत्व समझ आता है."
चंद्र नाम के एक यूजर ने लिखा, "हमें भारत को न्यूक्लियर पावर बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी का शुक्रिया अदा करना चाहिए. क्यों?
आज वेनेजुएला को देखिए. अमेरिका कभी नहीं चाहता कि कोई देश न्यूक्लियर पावर बने, क्योंकि वह अपनी शर्तें नहीं मनवा पाएगा और साथ ही, वह किसी न्यूक्लियर पावर वाले देश से पंगा भी नहीं लेना चाहता.
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, अमेरिका का युद्धपोत, एंटरप्राइज हम पर हमला करने वाला था, लेकिन रूस ने दखल दिया और हमें बचाया."

भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में एक यूजर ने नरसिम्हा राव के योगदान को याद करते हुए लिखा है कि आप नरसिम्हा राव को नहीं भूल सकते हैं. हर लीडर के पास विजन होता है, लेकिन नरसिम्हा राव के पास उसे लागू करने की क्षमता थी. पिछले 40 सालों में भारत की कोई भी उपलब्धि ले लीजिए, उसमें PVNR का मजबूत योगदान रहा है.

दरअसल नरसिम्हा राव भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में अहम कड़ी थे. 1995 में उन्होंने पोखरण में परमाणु परीक्षण की तैयारी का आदेश दिया, लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी के कारण इसे रद्द कर दिया गया. राव ने वैज्ञानिकों को तैयार रहने को कहा और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, ताकि अगली सरकार परीक्षण कर सके.
दरअसल 1998 में जब वाजपेयी सत्ता में लौटे तो उनकी सरकार कई पार्टियों के गठबंधन से बनी थी. शपथ ग्रहण के कुछ ही दिनों बाद पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव उनसे मिलने आए. राव ने वाजपेयी से कहा, “सामग्री तैयार है, आप आगे बढ़ सकते हैं.” यह इशारा था कि परमाणु बम परीक्षण की सारी तैयारी हो चुकी है. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में सत्ता संभालते ही पोखरण-II को मंजूरी दी थी.