क्या कोई शख्स काफी पहले मर चुके अपने किसी रिश्तेदार के शरीर के अवशेषों के साथ रात गुजार सकता है. यह सुनकर ही डरावना लगता है. ऐसा लगता है जैसे किसी डरावनी फिल्म का दृश्य हो. लेकिन, इस दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जो अपने रिश्तेदार या नजदीकी सगे-संबंधियों के शवों को संरक्षित रखते हैं और उनके साथ रात भी गुजराते हैं.
इंडोनेशिया के पपुआ प्रांत में कुछ ऐसे आदिवासी कबीले रहते हैं. जिनकी परंपराएं काफी अजीबोगरीब हैं. इनके बारे में सुनकर भी डर लगता है. ये लोग पहले तो अपने कबीले के बुजुर्ग मुखिया की मौत के बाद उनके शरीर का अंतिम संस्कार नहीं करते हैं. न तो इन्हें जलाया जाता है और न ही इन्हें दफनाया जाता है. ये अपने पूर्वजों के शवों को धुएं से संरक्षित ममी इसकी ममी बना लेते हैं, जो सैकड़ों सालों तक सुरक्षित रहता है.
पूर्वजों को ममी बनाकर रखते हैं येलोग
पपुआ में रहने वाले ये आदवासी दानी जनजाति से हैं. ये लंबे समय से अपने मृत रिश्तेदारों के शवों को ममी बनाकर उनके साथ रात बिताना पसंद करते हैं. इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत के एक सुदूर गांव वोगी में ये दानी आदिवासी का कबीला रहता है. येलोग अपने पूर्वजों की ममी को सुरक्षित रखने के लिए अलग से झोपड़ी बनाकर उसमें रखते हैं और इसकी रक्षा के लिए रात में वहां जाकर सोते भी हैं.
इन आदिवासियों ने अपने 250 साल पुराने पूर्वजों के शवों को धुएं से कालाकर उसकी ममी बनाकर अभी तक सुरक्षित रखा है. अधिकतर संरक्षित शव उनके कबीले के सरदारों के हैं. जिसने करीब 250 साल पहले शासन किया था. इनका लक्ष्य ममी बनाने की पुरानी दानी परंपरा को संरक्षित करना है. दानी आदिवासी अपने लोगों के शवों को मृत्यु के बाद धुएं के साथ संरक्षित करके रखते हैं.
संरक्षित किये गए शवों को पंखों, सुअर के दांतों और अलग-अलग तरह के चीजों से सजाकर रखा जाता है. फिर इसे जिस झोपड़ी में रखा जाता है, वहां आग जलाई जाती है. इसे "होनाई" के नाम से जाना जाता है.
कैसे शवों को ममी बनाते हैं दानी लोग
शवों को ममी बनाने के लिए दानी लोग पहले उसे धूप में सुखाते हैं. फिर एक गुफा में ले जाकर छिपा देते हैं. इसके बाद शवों को गर्म धुएं के संपर्क में लाया जाता है और शव में छेद करके उसके अंदर के वसा को तरल कर बाहर निकाला लिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं.
ऐसा करने से मिलता है पूर्वजों का आशीर्वाद...
दानी आदिवासियों का मानना है कि इस तरह से पूर्वजों के शव को संरक्षित कर उन्हें अपने साथ रखने से उनका आशीर्वाद मिलता है. इस वजह से उनकी समृद्धि और संपन्नता बढ़ती है. दानी आदिवासी इन संरक्षित शवों को किसी भ्रूण की तरह मोड़कर ही एक झोपड़े में रखते हैं. इसकी रक्षा के लिए लोग उस झोपड़ी में हर दिन रात में सोते हैं.
अब खत्म होने के कागार पर है यह प्रथा, बची हैं सिर्फ 6-7 ममियां
बताया जाता है कि दानियों के बीच शवों को ममी बनाकर संरक्षित करना एक समय आम बात थी, लेकिन 30 से 50 साल पहले इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरीज खुलने से ये उन्हें अपने मृतकों को ममी बनाने के बजाय दफनाने के लिए प्रोत्साहित करने लगे. इस वजह से धीरे-धीरे यह प्रथा समाप्त हो रही. अब सिर्फ छह या सात ममियां ही बची हैं.