साहिर लुधियानवी का शेर है-वक्त से दिन और रात, वक्त से कल और आज. वक्त की हर शय गुलाम, वक्त का हर शय पे राज. वक्त की पाबंद हैं आती-जाती रौनकें. वक्त है फूलों की सेज, वक्त है कांटों का ताज. आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे, कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज.
यह शेर बताता है कि वक्त से बड़ा कुछ नहीं होता. इंसान कितनी भी बड़ी प्लानिंग कर ले, लेकिन वक्त के आगे सब बेबस हो जाता है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो इसी बात को साबित करता नजर आ रहा है.
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर अजय मिश्रा ने शेयर किया है, जो खुद को जीएसटी में एडिशनल कमिश्नर बताते हैं. वीडियो में वह एक बुजुर्ग व्यक्ति से बातचीत करते दिखते हैं, जिनका नाम संतोष गोयल है.
NDA में पढ़ाने वाले टीचर, आज मंदिर में रह रहे
संतोष गोयल बताते हैं कि उन्होंने इंग्लिश में पीएचडी की है और साल 1971 में उन्होंने NDA में बच्चों को पढ़ाया था. वह एक समय शिक्षक के रूप में सम्मानजनक जीवन जी रहे थे.लेकिन आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उनकी नौकरी छूट गई. वह कहते हैं कि अगर वह 15 साल तक नौकरी कर लेते, तो आज उन्हें 70 से 75 हजार रुपये तक पेंशन मिल रही होती.
देखें वायरल वीडियो
अब मंदिर में गुजर रहा जीवन
आज संतोष गोयल मंदिर में रह रहे हैं, जहां से उन्हें खाने-पीने की व्यवस्था मिल जाती है. उनकी जिंदगी का यह बदलाव लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि वक्त कब किसे कहां ले जाए, कहा नहीं जा सकता.
इस वीडियो को देखकर सोशल मीडिया पर लोग भावुक हो गए. कई यूजर्स ने कहा कि संतोष गोयल की मदद की जानी चाहिए. वहीं कुछ लोगों ने अजय मिश्रा की तारीफ की कि उन्होंने यह कहानी दुनिया के सामने रखी.
लोगों ने इसे एक बड़ा सबक भी बताया कि इस दुनिया में किसी भी चीज का घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि वक्त कभी भी बदल सकता है.