सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दिल छू लेने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पाकिस्तान के एक संगीतकार पहाड़ों के बीच बैठकर मशहूर गाना 'कल हो ना हो' अपनी रुबाब पर बजाते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस शांत संगीत ने सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि जानवरों को भी अपनी ओर खींच लिया.
पहाड़ों के बीच बजा रहे थे रुबाब
यह वीडियो पाकिस्तानी संगीतकार सागर हयात ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. वीडियो में वह एक ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में चट्टान पर बैठकर रुबाब बजाते नजर आते हैं. पीछे बर्फ से ढकी पहाड़ियां दिखाई देती हैं और पास में कुछ भेड़ें और बकरियां चर रही होती हैं.
संगीत सुनते ही पास आने लगीं भेड़ें
वीडियो में जैसे ही हयात रुबाब बजाना शुरू करते हैं, एक दिलचस्प नजारा देखने को मिलता है. जो भेड़ें पहले दूर-दूर चर रही थीं, वे धीरे-धीरे उनकी तरफ आने लगती हैं.कुछ ही पलों में पूरा झुंड उनके आसपास इकट्ठा हो जाता है. हैरानी की बात यह है कि भेड़ें वहां शांत खड़ी रहती हैं, मानो वे भी उस धुन को सुन रही हों.
देखें वायरल वीडियो
संगीत की ताकत का अनोखा उदाहरण
हयात ने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि जब वह इस धुन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब आसपास शांत पहाड़ी नजारा और भेड़ों का एक छोटा झुंड मौजूद था.उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने रुबाब बजाना शुरू किया, भेड़ें धीरे-धीरे उनके पास आकर खड़ी हो गईं. यह पल उनके लिए बेहद खास और भावुक था.
संगीतकार ने लिखा कि यह एक खूबसूरत और अप्रत्याशित पल था, जिसने मुझे संगीत की असली ताकत का एहसास कराया. बिना शब्दों के भी रुबाब की धुन एक ऐसा संबंध बना सकती है, जो भाषा से परे है.
क्या है रुबाब?
रुबाब एक पारंपरिक तार वाला वाद्य यंत्र है, जो खास तौर पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत के संगीत में इस्तेमाल होता है.इसे अक्सर एक ही लकड़ी के टुकड़े से तराशकर बनाया जाता है. इसमें छोटा सा गर्दन वाला हिस्सा, चमड़े से ढका खोखला ढांचा और कई तार होते हैं, जिन्हें उंगलियों से बजाया जाता है. इसकी गहरी और मधुर ध्वनि की वजह से इसे अफगान संगीत में कभी-कभी 'वाद्य यंत्रों का शेर' भी कहा जाता है.
हयात का यह वीडियो सोशल मीडिया पर इसलिए भी वायरल हो रहा है, क्योंकि इसमें संगीत और प्रकृति के बीच एक बेहद खूबसूरत रिश्ता दिखाई देता है.