लद्दाख के बेहद ऊंचे और खतरनाक माने जाने वाले शिंकू ला दर्रे पर एक ऐसी घटना हुई जिसने लोगों को झकझोर दिया है. यह दर्रा लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है. यहां आम लोगों के लिए भी सांस लेना मुश्किल हो सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक बन जाती है. घटना के दौरान एक परिवार अपने छह महीने के छोटे बच्चे के साथ इस इलाके से गुजर रहा था. अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया. पिता घबराकर उसे गोद में लिए खड़ा था और मदद की तलाश कर रहा था. वहां मौजूद माहौल बेहद तनावपूर्ण था क्योंकि परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि अचानक बच्चे को क्या हो गया.
सफर के दौरान अचानक बिगड़ी बच्चे की तबीयत
इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक अजनबी ने स्थिति को तुरंत समझ लिया. उसने देखा कि बच्चा ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी की वजह से बेहोश हो सकता है. बिना देर किए वह अपनी कार के पास गया और तुरंत पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आया. उसने बच्चे के मुंह और नाक पर ऑक्सीजन मास्क लगाया और धीरे-धीरे उसे सांस दिलाने की कोशिश की. कुछ ही सेकंड के भीतर इसका असर दिखने लगा. जैसे ही बच्चे को ऑक्सीजन मिलने लगी, वह धीरे-धीरे होश में आने लगा और रोने लगा. यह देखकर वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली. परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि कुछ ही समय पहले तक बच्चे की हालत बहुत गंभीर लग रही थी.
अजनबी ने दिखाई तुरंत समझदारी
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो को X पर शेयर किया गया, जिसके साथ ऊंचाई वाले इलाकों में यात्रा के खतरों के बारे में चेतावनी भी दी गई. बताया गया कि परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इतनी ऊंचाई पर छोटे बच्चे के लिए ऑक्सीजन की कमी कितनी खतरनाक हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी अधिक ऊंचाई पर एक्यूट माउंटेन सिकनेस यानी ऊंचाई की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. इसमें सिर दर्द, सांस लेने में परेशानी, उल्टी और बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है. छोटे बच्चों के लिए यह जोखिम और भी ज्यादा होता है क्योंकि उनका शरीर ऐसे वातावरण को जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता.
कुछ ही सेकंड में बच्चे की हालत में सुधार
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कई लोगों ने उस अजनबी की तुरंत मदद करने की सराहना की और कहा कि उसकी सूझबूझ और समय पर लिया गया कदम बच्चे की जान बचाने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ. वहीं कुछ लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि इतनी ऊंचाई पर छोटे बच्चे को लेकर यात्रा करना कितना सुरक्षित है.
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
कई यूजर्स ने यह भी लिखा कि पहाड़ी इलाकों की यात्रा सिर्फ घूमने जैसा नहीं होता, बल्कि वहां शरीर पर काफी दबाव पड़ता है. ऐसे में बिना तैयारी और जानकारी के यात्रा करना खतरनाक साबित हो सकता है. डॉक्टरों की सलाह के बिना छोटे बच्चों को ऐसे ऊंचे स्थानों पर ले जाना जोखिम भरा हो सकता है. कुल मिलाकर यह घटना एक बड़ा संदेश देती है कि ऊंचाई वाले इलाकों में यात्रा करते समय सावधानी बहुत जरूरी है. ऑक्सीजन की कमी जैसी स्थिति कभी भी गंभीर रूप ले सकती है. साथ ही यह भी साबित हुआ कि एक जागरूक और समय पर मदद करने वाला इंसान किसी की जान बचा सकता है.