आजकल कई लोग बेहतर कमाई के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सुकून और संतुलन के लिए वापस अपने देश लौट रहे हैं. ऐसी ही कहानी है केरल की लीबा सुबिन की, जो हाल ही में दुबई से अपने परिवार के साथ भारत लौट आईं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर बताया कि उन्होंने यह फैसला क्यों लिया. लीबा ने कहा कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. उन्होंने और उनके परिवार ने सोच-समझकर यह कदम उठाया. असली मोड़ तब आया जब दुबई में उनके वीजा और घर के किराए के रिन्यू का एक ही दिन बचा था. तब उन्होंने बैठकर अपनी ज़िंदगी और प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार किया.
बच्चे की पढ़ाई बनी बड़ी वजह
केरल में उन्हें अपने घर से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर एक अच्छा इंटरनेशनल स्कूल मिल गया. वहां बच्चे सिर्फ 10 मिनट में स्कूल पहुंच जाते हैं. जबकि दुबई में उनके बच्चे को सुबह 6 बजे घर से निकलना पड़ता था और रोज़ लगभग 90 मिनट सफर करना पड़ता था.
अपना घर, बिना किराया
परिवार ने 2021 में केरल में अपना विला बना लिया था. इसलिए भारत लौटने के बाद उन्हें किराया नहीं देना पड़ा. लीबा ने कहा कि अपने घर में रहने से उन्हें पड़ोसियों से मेलजोल और अपनापन फिर से महसूस हुआ.
सबसे बड़ी राहत – कर्ज से आजादी
भारत आने के बाद परिवार ने अपना बचा हुआ होम लोन भी चुका दिया. अब उन पर कोई EMI नहीं है. लीबा के मुताबिक, कर्ज मुक्त जीवन ने उन्हें मानसिक शांति दी, जिसकी कीमत बहुत बड़ी है.
माता-पिता के करीब रहना
लीबा ने बताया कि उनके माता-पिता अब 70 और 80 साल के हैं. उनके पास रहना उन्हें जिम्मेदारी से ज्यादा सौभाग्य लगता है. कई एनआरआई परिवार अपने बच्चों को 10वीं या 12वीं के बाद भारत भेज देते हैं. लीबा ने सोचा कि जल्दी लौटने से बच्चे को यहां के माहौल में ढलने में आसानी होगी.
काम पर नहीं पड़ा असर
लीबा ने 8 साल पहले एक ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया था, जिसे वह कहीं से भी चला सकती हैं. इसलिए भारत आने से उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ा. उन्होंने 6–7 महीने का इमरजेंसी फंड बनाया, हेल्थ इंश्योरेंस लिया और बच्चे की पढ़ाई के लिए SIP जारी रखी. आखिर में लीबा ने कहा कि यह फैसला दुबई और भारत की तुलना करने का नहीं था, बल्कि यह सोचने का था कि लंबी अवधि में उनके परिवार के लिए कौन-सी जगह ज्यादा स्थिर और सुकून देने वाली है.