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बीमार मां की देखभाल के लिए मिली 1 महीने की पेड लीव, कंपनी के इस फैसले की हो रही तारीफ

बिंगलब्स के सह-संस्थापक दिव्य अग्रवाल ने अपनी एक महिला एंप्लॉयी को बीमार मां की देखभाल के लिए बिना किसी शर्त के एक महीने की पेड लीव दी, जिसे लोगों ने इंसानियत और असली वर्क कल्चर की मिसाल बताया.

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 बिंगलैब्स के सह-संस्थापक दिव्य अग्रवाल की सोसल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है. ( Photo: Pexels) 
बिंगलैब्स के सह-संस्थापक दिव्य अग्रवाल की सोसल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है. ( Photo: Pexels) 

आज के समय में ज्यादातर कंपनियों में कर्मचारियों से हर वक्त काम की उम्मीद की जाती है. ऐसे माहौल में एक भारतीय बिजनेस का इंसानियत भरा फैसला लोगों का दिल जीत रहा है. उन्होंने अपनी एक महिला कर्मचारी को उसकी बीमार मां की देखभाल के लिए बिना किसी शर्त के पूरे एक महीने की पेड लीव दी.  यह फैसला सोशल मीडिया ग्रोथ कंपनी बिंगलैब्स के सह-संस्थापक दिव्य अग्रवाल ने लिया. उन्होंने लिंक्डइन पर बताया कि पिछले साल उनकी टीम की एक महिला कर्मचारी ने उनसे छुट्टी मांगी थी, क्योंकि उसकी मां की तबीयत बहुत खराब थी और उन्हें पूरे समय देखभाल की जरूरत थी.

काम के दबाव के बीच इंसानियत की मिसाल
कर्मचारी ने यह भी कहा था कि वह शाम को थोड़ा काम कर लेगी और फोन कॉल उठाती रहेगी, ताकि ऑफिस का काम प्रभावित न हो. लेकिन इसके बावजूद, कंपनी ने उससे कोई शर्त नहीं रखी और उसे पूरे एक महीने की छुट्टी दे दी, वो भी पूरी सैलरी के साथ. दिव्य अग्रवाल ने लिखा कि यह सुनकर कर्मचारी काफी हैरान रह गई, क्योंकि उसे लगा था कि छुट्टी के बदले कुछ नियम या दबाव होंगे. इस दौरान कंपनी के दो प्रोजेक्ट थोड़े देर से पूरे हुए, लेकिन टीम ने मिलकर सब संभाल लिया.

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टीम ने मिलकर संभाला काम का दबाव
जब कर्मचारी छुट्टी के बाद वापस आई, तो उसने पूरे साल में कंपनी के लिए अपना सबसे अच्छा काम किया. अग्रवाल का कहना है कि ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वह खुद को कंपनी का एहसानमंद मान रही थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उसे यह भरोसा हो गया था कि कंपनी सच में अपने कर्मचारियों की परवाह करती है.

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यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इस फैसले की जमकर तारीफ की. कई लोगों ने कहा कि जब कंपनी मुश्किल समय में कर्मचारियों का साथ देती है, तो उनका हौसला बढ़ता है और वे दिल से काम करते हैं. कुछ यूजर्स ने इसे 'असली वर्क कल्चर' बताया, जो सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि फैसलों में दिखता है. कुल मिलाकर, यह कहानी बताती है कि इंसानियत और भरोसे से न सिर्फ रिश्ते मजबूत होते हैं, बल्कि काम भी पहले से बेहतर हो जाता है.

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